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उद्धव को ढाई साल ही रहना था

महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर जितनी तरह की साजिशों की कहानियां थीं उन सबका अंत नतीजा यहीं था कि भाजपा की सरकार बनेगी, जो कि बनने जा रही है। लेकिन उससे पहले उद्धव ठाकरे के इस्तीफे के बाद भाजपा और शिव सेना की ओर से दो कहानियां सुनाई जा रही हैं। पहली कहानी भाजपा के नेता सुना रहे हैं। उनका कहना है कि शिव सेना ने जनादेश का अपमान किया था। वह भाजपा के साथ मिल कर लड़ी थी और बाद में एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बना ली। इसलिए उद्धव को जाना ही था।

हालांकि जनादेश के अपमान वाली इस थ्योरी में कोई दम नहीं है क्योंकि खुद भाजपा ने महाराष्ट्र में अपनी पहली सरकार एनसीपी की मदद से बनाई थी, जिसके नेता शरद पवार और अजित पवार को भ्रष्ट चाचा-भतीजे की जोड़ी बता कर भाजपा ने चुनाव लड़ा था। भाजपा जम्मू कश्मीर से लेकर हरियाणा तक अनेक राज्यों में उन पार्टियों के साथ मिल कर सरकार बना चुकी है, जिनके खिलाफ उसने चुनाव लड़ा। इसके बावजूद शिव सेना की सरकार गिराने के लिए भाजपा जनादेश के अपमान वाली थ्योरी की कहानी सुना रही है।

दूसरी कहानी शिव सेना के नेता और उनके समर्थक सुना रहे हैं। उनका कहना है कि सब कुछ उद्धव ठाकरे की लिखी पटकथा के हिसाब से हो रहा है। महाराष्ट्र विधानसभा के 2019 के चुनाव के बाद भाजपा से बातचीत में उद्धव की शर्त थी कि पहले ढाई साल शिव सेना का मुख्यमंत्री रहेगा और उसके बाद ढाई साल भाजपा का सीएम बनेगा। भाजपा तैयार नहीं हुई तो उद्धव ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिल कर सरकार बनाई और ढाई साल सीएम रहे। ठीक ढाई साल बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। अब अगले ढाई साल तक भाजपा का मुख्यमंत्री रहेगा और उसके बाद चुनाव होगा।

इस कहानी के लेखकों का कहना है कि आने वाले दिनों में पता चलेगा कि कैसे सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ है। इनका कहना है कि उद्धव को राज्य सरकार से ज्यादा बृहन्नमुंबई नगर निगम यानी बीएमसी की चिंता है, जिस पर शिव सेना का पिछले 25 साल से कब्जा है। शिव सेना को पता है कि बीएमसी चुनाव में एनसीपी और कांग्रेस के साथ लड़ कर जीतना मुश्किल होगा। उनके साथ रहने भर से भी मुंबई में शिव सेना को नुकसान होता। अब पार्टी ने उस नुकसान की संभावना खत्म कर दी है। अब सारी पार्टियां अलग अलग लड़ेंगी और शिव सेना हिंदुत्व व मराठी मानुष के अपने एजेंडे पर चुनाव लड़ेगी। तभी यह भी कहा जा रहा है कि राज्य की गठबंधन सरकार गंवा कर शिव सेना बीएमसी में अपनी सत्ता बचाने का प्रयास कर रही है।

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