महाराष्ट्र में चक्र उलटा घूमने लगा!

महाराष्ट्र में क्या बिहार का इतिहास दोहराया जाएगा? जिस तरह बिहार में एनडीए छोड़ कर यूपीए के साथ गए नीतीश कुमार डेढ़ साल में वापस लौट कर एनडीए में आ गए थे, उसी तरह क्या उद्धव ठाकरे भी वापसी की राह बनाने में लगे हैं? जानकार सूत्रों का कहना है कि अभी तुरंत भले न हो पर चक्र उलटा घूमने लगा है। इसकी शुरुआत विधान परिषद चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से टेलीफोन पर हुई बातचीत से हो गई है। उसी की आगे की कड़ी है, जो उद्धव ठाकरे के निर्विरोध रूप से विधान परिषद सदस्य चुने जाने के बाद शिव सेना ने प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दोनों की तारीफ की और उनका आभार जताया।

गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे जब मुख्यमंत्री बने थे तब वे किसी सदन के सदस्य नहीं थे और उनको 28 फरवरी से पहले किसी भी हाल में दोनों सदनों में से किसी का सदस्य बनना था। विधान परिषद को मनोनयन वाले कोटे से उद्धव को उच्च सदन में भेजने की सिफारिश कैबिनेट ने की थी, जिसे राज्यपाल लटकाए हुए थे। परिषद की नौ और सीटें खाली हुई थीं पऱ उनका चुनाव लॉकडाउन की वजह से रूका हुआ था। तभी उद्धव ने प्रधानमंत्री को फोन किया और 48 घंटे के भीतर राज्यपाल ने चुनाव की सिफारिश की और चुनाव आयोग ने चुनाव की घोषणा कर दी।

सो, जब उद्धव चुन लिए गए तो शिव सेना के मुखपत्र सामना ने मोदी और शाह दोनों की तारीफ की और उनका आभार जताया। चूंकि उद्धव ने प्रधानमंत्री से बात की थी इसलिए उनका आभार जताना समझ में आता है पर अमित शाह का आभार जताना एक नए समीकरण का संकेत है। ध्यान रहे राजनीतिक दांवपेंच का काम अमित शाह ही संभालते हैं। तभी सामना के संपादकीय के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं। जिस दिन सामना में यह लेख छपा उसी दिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने राज्य सरकार के कामकाज पर सवाल उठाया। उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री को निशाना बनाते हुए कहा कि राज्य कामकाज नौकरशाही के हवाले छोड़ा गया है। ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस को कुछ अंदाजा होने लगा है तभी चव्हाण जैसे बड़े नेता ने इस तरह का बयान दिया।

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