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शिवसेना का इस्तेमाल करती रही है कांग्रेस

कांग्रेस पार्टी के नेता गुड़ खाकर गुलगुले से परहेज कर रहे हैं। महाराष्ट्र के अलग अलग

हिस्सों में कई जगह कांग्रेस के जिला स्तर के नेताओं ने शिव सेना के साथ तालमेल

करके जिला परिषद, नगर निगम आदि में बोर्ड का गठन किया है।

पर कांग्रेस के नेता राज्य में शिव सेना की सरकार बनवाने में सिद्धांतों की बात कर रहे हैं।

वहां भी एनसीपी के जरिए शिव सेना को समर्थन देने का रास्ता चुना जा रहा है।

यानी सीधे समर्थन देने की बजाय पार्टी हाथ घूमा कर कान पकड़ रही है।

असल में कांग्रेस ने पिछले चार-पांच दशक में इसी तरह से शिव सेना का इस्तेमाल किया है।

उसके नेता शिव सेना की कट्टर हिंदुवादी और मराठी मानुष की नीति का विरोध करते रहेंगे और जहां जरूरत होगी वहां उसका इस्तेमाल करेंगे।

पर यह सारा काम गोपनीय तरीका से होगा।

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यह अलग बात है कि सबको सब बातें पता होती हैं औऱ आज कल तो सोशल मीडिया का जमाना है,

जिसमें जानकारी फैलने में समय नहीं लगता है।

बहरहाल, सबसे पहले कांग्रेस के दिग्गज नेता वसंत राव नाईक ने शिव सेना का इस्तेमाल किया था।

उन दिनों महाराष्ट्र में वामपंथी और समाजवादी मजदूर संगठन बहुत मजबूत थे।

औद्योगिक राज्य होने की वजह से सरकार को नियमित रूप से मजदूर संगठनों से जूझना होता था।

तब नाईक ने शिव सेना का इस्तेमाल वामपंथी व समाजवादी मजदूर संगठनों को कमजोर करने या उनका जवाब देने के लिए किया।

एक समय ऐसा भी था, जब शिव सेना को वसंत सेना कहा जाता था।

हाल के दिनों में शिव सेना ने दो बार खुल कर कांग्रेस का समर्थन किया।

पहले 2007 में प्रतिभा पाटिल को राष्ट्रपति चुनाव में शिव सेना ने समर्थन किया।

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वे मराठी थी इसलिए शिव सेना का समर्थन देना समझ में आता है पर 2012 में शिव सेना ने कांग्रेस उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का भी समर्थन किया।  तब भी शिव सेना कट्टर हिंदुवादी पार्टी थी और एनडीए में भाजपा की सहयोगी थी।

पर कांग्रेस ने उसका समर्थन लेने में परहेज नहीं किया। पर कांग्रेस को शिव सेना को समर्थन देने में परहेज है। देश की इक्का दुक्का पार्टियों ने ही इमरजेंसी के समय इंदिरा गांधी का समर्थन किया था।

उस समय बाल ठाकरे ने आगे बढ़ कर इमरजेंसी पर कांग्रेस का समर्थन किया।

उन्होंने क्यों और किस वजह से कांग्रेस का समर्थन किया, इस बारे में कांग्रेस नेता ही बेहतर बता सकते हैं।

उसके बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता और गांधी परिवार के करीबी रहे मुरली देवड़ा को मेयर बनाने के लिए भी कांग्रेस ने शिव सेना का समर्थन लिया।

यानी जिला परिषद से लेकर मुंबई के मेयर और राष्ट्रपति चुनाव तक कांग्रेस को शिव सेना का समर्थन लेने में कभी भी दिक्कत नहीं रही पर उसे समर्थन देने में कांग्रेस के नेताओं को दिक्कत हो रही है।

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