गांधी क्या ऐसे संघ, भाजपा के हो जाएंगे?

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी दोनों बहुत सोच समझ कर, धीरे-धीरे आजादी के नायकों को अपना बनाने का अभियान चला रहे हैं। सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मदन मोहन मालवीय आदि इसकी मिसाल हैं, जिनको अपना बनाया और बताया जा रहा है। वैसे तो महात्मा गांधी कभी भी संघ और भाजपा की योजना में फिट नहीं बैठते हैं पर ऐसा  लग रहा है कि उनको भी अपना बनाने का अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए उनको देशभक्त हिंदू बताने का एक दांव चला गया है। ध्यान रहे उनके घनघोर विरोधी और प्रतिद्वंद्वी मोहम्मद अली जिन्ना उनको हमेशा ‘हिंदुओं का सबसे बड़ा नेता’ कह कर संबोधित करते थे। वहीं काम अब फिर से किया जा रहा है।

दो लेखकों- जेके बजाज और एमडी श्रीनिवास ने महात्मा गांधी के ‘हिंद स्वराज’ को आधार बना कर एक किताब लिखी है, जिसे एक जनवरी को आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत रिलीज करेंगे। इस किताब के नाम से ही इसके कंटेंट का पता चल जाता है। किताब का नाम है- मेकिंग ऑफ अ हिंदू पैट्रियेटःबैकग्राउंड ऑफ गांधीज हिंद स्वराज। दोनों लेखकों का कहना है कि ‘हिंद स्वराज’ धार्मिक राष्ट्रवाद के उभार की कहानी है और साथ ही महात्मा गांधी के हिंदू राष्ट्रभक्त बनने की भी कहानी है। सोचें, महात्मा गांधी को कोई कैसे हिंदू राष्ट्रभक्त कह सकता है?

जिस व्यक्ति ने हिंदू धर्म की अनगिनत बुराइयों के खिलाफ जीवन भर लड़ाई की, आजादी के आंदोलन में सांप्रदायिकता को दूर रखने के अनगिनत प्रयास किए और हिंदू-मुस्लिम एकता की बात करते हुए शहीद हुए उनको हिंदू राष्ट्रभक्त और उनकी सबसे बेहतरीन रचना ‘हिंद स्वराज’ को धार्मिक राष्ट्रवाद के उभार की कहानी बताना किसी दूरगामी रणनीति का हिस्सा लगता है। ऐसा लग रहा है कि जब यह लगने लगा कि गांधी से पीछा नहीं छुड़ा सकते हैं और न इस देश के मानस से गांधी को निकाल सकते हैं तो उनको अपना बनाने का अभियान शुरू किया गया। ध्यान रहे एक तरफ गांधी जयंती के मौके पर गोडसे अमर रहे का नारा सोशल मीडिया पर ट्रेंड कराया जाता है तो दूसरी ओर उन्हें हिंदू राष्ट्रभक्त साबित करने का प्रयास होता है।

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