सांसद और मंत्री बनना था मनोज सिन्हा को!

पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा को राज्यपाल बनाए जाने की चर्चा कुछ समय पहले से चल रही थी। कहा जा रहा था कि भाजपा उनको बिहार का राज्यपाल बना कर भेजेगी। हालांकि उससे कोई राजनीति सधने वाली नहीं थी क्योंकि बिहार में वैसे भी भूमिहार भाजपा और जदयू के बंधुआ वोटर हैं। बहरहाल, उनको बिहार भेजने की बजाय जम्मू कश्मीर का उप राज्यपाल बना कर भेज दिया गया।

सोचें, लोकसभा चुनाव हारने के बाद उनको लेकर क्या क्या चर्चाएं हो रही थीं। कहा जा रहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनको इतना पसंद करते हैं कि पहला मौका मिलते ही राज्यसभा में लाकर केंद्र में मंत्री बनाएंगे। पर उनके मौके आए और चले गए, मनोज सिन्हा को राज्यसभा नहीं मिली। अब भी उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की दो सीटों के उपचुनाव इसी महीने होने वाले हैं। एक सीट अमर सिंह की भी खाली हो गई है। ये तीनों सीटें भाजपा को मिलेंगी। उसके बाद नवंबर में दस सीटें खाली हो रही हैं, जिनके लिए अक्टूबर में चुनाव होने हैं। उन दस में से नौ सीटें भाजपा को मिलेंगी।

बड़े आराम से भाजपा उनको राज्यसभा में भेज सकती थी और मंत्रिमंडल विस्तार में उनको सरकार में लाया जा सकता था। अगर बिहार चुनाव में उनके जरिए कोई मैसेज देना है तब भी राज्यसभा में भेजना और मंत्री बनाने की संभावना पैदा करना ज्यादा प्रभावी होता। तभी सवाल है कि क्या उत्तर प्रदेश की घरेलू राजनीति के चक्कर में मनोज सिन्हा निपटे हैं? क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनको राज्यसभा देने को तैयार नहीं हो रहे थे? या भाजपा ने हाल में बिहार में विवेक ठाकुर को राज्यसभा में भेजा था तो मान लिया कि अब इससे ज्यादा भूमिहार राज्यसभा में भेजने की जरूरत नहीं है? बहरहाल, राज्यपाल लोग भी सक्रिय राजनीति में लौटे हैं और मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री आदि बने हैं पर अब मनोज सिन्हा को इंतजार करना होगा। फिलहाल तो वे जीसी मुर्मू, अनिल बैजल, किरण बेदी आदि की श्रेणी में आ गए हैं।

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