हरियाणा में भी मध्यावधि चुनाव संभव

पंजाब की तरह हरियाणा में भी समय से पहले चुनाव हो सकता है। हालांकि पंजाब में राज्य सरकार खुद ही इस योजना पर विचार कर रही है लेकिन हरियाणा में सरकार किसी हाल में मध्यावधि चुनाव की नौबत नहीं आने देना चाहती है। सरकार चला रही भाजपा और सरकार में शामिल दुष्यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी की कोशिश किसी तरह से अपने विधायकों को संभाल कर रखने की है। लेकिन कृषि कानूनों के विरोध की वजह से ज्यादातर विधायक चिंता में हैं। उनको लग रहा है कि अगर वे किसानों का साथ नहीं देते हैं तो अगली बार उनके लिए जीतना मुश्किल होगा। ध्यान रहे मंडियों और न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था खत्म होने पर सबसे ज्यादा असर पंजाब और हरियाणा के किसानों पर ही हुआ है।

इस बीच राज्य की बरौदा सीट पर उपचुनाव में कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की है। इस एक सीट पर पूरी सरकार चुनाव लड़ रही थी। मनोहर लाल खट्टर सरकार ने पूरी ताकत सीट जीतने में लगाई थी पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा ने अकेले मोर्चा संभाले रखा और कांग्रेस की जीती हुई इस सीट को बचा लिया। उसके बाद से जाट बहुल इलाकों में हुड्डा का समर्थन बढ़ा है। जिस तरह पंजाब में कैप्टेन अमरिंदर सिंह किसान विरोध का चेहरा बने हैं वैसे ही हरियाणा में हुड्डा पिता-पुत्र किसान विरोध का चेहरा हैं। बहरहाल, बताया जा रहा है कि चौटाला की पार्टी के कई विधायक परेशान हैं। भाजपा के भी कुछ विधायक परेशान हैं। कई विधायक इस्तीफा देना चाहते हैं। लेकिन वे यह भरोसा चाहते हैं कि वे इस्तीफा दें तो सरकार गिरे और मध्यावधि चुनाव हो। उपचुनाव से विधायक बचना चाहते हैं। लेकिन सरकार गिराने के लायक संख्या में विधायक अभी एकजुट नहीं हो पा रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares