सुशील मोदी की मंत्री बनने की बेचैनी

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बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी को जब इस बार राज्य सरकार में जगह नहीं मिली और पार्टी आलाकमान ने उनको राज्यसभा में भेजा तो वे इस तैयारी के साथ दिल्ली आए थे कि आते ही केंद्र में वित्त मंत्री बनेंगे। लेकिन छह महीने बाद भी मंत्री पद मृग मरीचिका की तरह दिख रही है। अभी सरकार में फेरबदल की सुगबुगाहट नहीं है और अगर मंत्रिमंडल में विस्तार होता भी है तो उन्हें कोई अहम पद मिलेगा, इसकी चर्चा नहीं है। सो, वे बुरी तरह से बेचैन और बौखलाए हुए से हैं। तभी वे लगातार ट्विट करके किसी तरह से पार्टी आलाकमान को खुश करने में लगे रहते हैं। उनके ट्विट का एकमात्र निशाना जेल में बंद लालू प्रसाद या एम्स में इलाज करा रहे बीमार लालू प्रसाद होते हैं। लालू प्रसाद के जमानत मिलने के बाद किए अपने बेसिरपैर के ट्विट के लिए वे निशाने पर आए थे।

अब एक बार फिर वे निशाने पर हैं धानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुश करने वाले ट्विट की वजह से। सुशील मोदी ने ट्विट किया कि पोलिया का टीका बनाने में दुनिया के 50 साल लग गए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत ने एक साल के अंदर दो स्वदेशी टीके बना लिए। तथ्यात्मक रूप से भी यह बात गलत है। भारत में एक टीका स्वदेशी है। सीरम इंस्टीच्यूट में बन रहा कोवीशील्ड टीका तो ब्रिटेन की संस्था ऑक्सफोर्ड और स्वीडेन की कंपनी एस्ट्राजेनेका ने बनाई है। लेकिन अगर भारत बायोटेक ने स्वदेशी वैक्सीन बनाई है तो उसमें प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व का क्या योगदान है?

इसके बाद सुशील मोदी ने इससे भी कमाल का एक ट्विट किया। उन्होंने ट्विट किया कि केंद्र सरकार ने वैक्सीन के लिए साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जिससे 50 करोड़ लोगों को टीका लग जाएगा। सोचें, उनको वित्त मंत्री बनना है और यह ध्यान नहीं है कि सरकार ने आम बजट में साढ़े तीन हजार नहीं, बल्कि 35 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। उनका यह हिसाब भी गलत है कि इससे 50 करोड़ लोगों को टीका लगेगा। भारत सरकार जिस कीमत पर वैक्सीन खरीद रही है उस कीमत पर देश के सभी व्यस्क लोगों को टीका लग जाएगा और उसके बाद भी साढ़े चार हजार करोड़ रुपए बच जाएंगे। वैसे उन्होंने जिस तरह का हिसाब लगाया है इससे वे वित्त मंत्री के सर्वाधिक योग्य बन जाते हैं।

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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