मोदी कैबिनेट बिना सहयोगी मंत्री के! - Naya India
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मोदी कैबिनेट बिना सहयोगी मंत्री के!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। उन्होंने करीब डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी अपनी कैबिनेट में फेरबदल नहीं की इसके बावजूद अपने आप उसका स्वरूप बदल रहा है। पिछले साल 30 मई को जब प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी कैबिनेट के साथ शपथ ली थी तब उसमें सहयोगी पार्टियों के तीन कैबिनेट मंत्री थे। अब सहयोगी पार्टी का एक भी कैबिनेट मंत्री नहीं है। सहयोगी पार्टियों में से अब सिर्फ रामदास अठावले अकेले बचे हैं, जो सरकार का हिस्सा हैं। आरपीआई के नेता रामदास अठावले मोदी सरकार में राज्य मंत्री हैं।

पिछले साल 30 मई को कैबिनेट मंत्री के तौर पर अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल, शिव सेना के नेता अरविंद सावंत और लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान ने शपथ ली थी। भाजपा की पुरानी सहयोगी जनता दल यू से भी एक कैबिनेट मंत्री बनाया जाना था पर प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व दिए जाने के विरोध में नीतीश कुमार ने शपथ लेने को तैयार बैठे आरसीपी सिंह को रोक दिया था। भाजपा की और सहयोगी अपना दल को पिछली सरकार में राज्यमंत्री का पद मिला था पर इस बार उन्हें वह भी नहीं मिला।

बहरहाल, सबसे पहले शिव सेना सरकार से बाहर हुई। लोकसभा चुनाव के पांच महीने बाद महाराष्ट्र में विधानसभा के चुनाव हुए थे, जिसमें भाजपा और शिव सेना साथ लड़े थे। नतीजों के बाद शिव सेना ने मुख्यमंत्री पद के बंटवारे की ऐसी जिद पकड़ी की दोनों पार्टियां अलग हो गईं और शिव सेना ने अपनी धुर विरोधी कांग्रेस व एनसीपी के साथ मिल कर सरकार बना ली। तब भारी उद्योग मंत्री अरविंद सावंत ने इस्तीफा दिया था।

दूसरा इस्तीफा अकाली दल की इकलौती मंत्री हरसिमरत कौर बादल का हुआ। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण मंत्री पद से इस्तीफा दिया। ध्यान रहे शिव सेना और अकाली दल दोनों भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी पार्टियां हैं। अब दोनों एनडीए से अलग हो चुकी हैं। इन दोनों के अलग होने के बाद सहयोगी पार्टियों में से एकमात्र कैबिनेट मंत्री रामविलास पासवान थे। पिछले दिनों उनका निधन हो गया।

इस तरह नरेंद्र मोदी की कैबिनेट अब पूरी तरह से भाजपा की कैबिनेट हो गई है। ऐसा लग रहा है कि यह स्थिति आने वाले कुछ दिनों तक बनी रहेगी। अगर जनता दल यू के साथ बिहार में गठबंधन बना रहता है और नीतीश कुमार अपनी पार्टी को सरकार में शामिल करने के लिए राजी होते हैं तो कैबिनेट में सहयोगी पार्टी को जगह मिलेगी। इसी तरह अगर अन्ना डीएमके सरकार में शामिल होने का फैसला करती है तब भी कैबिनेट में सहयोगी पार्टियों का प्रतिनिधित्व हो सकता है।

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