मंत्री पद के दावेदारों की चर्चा नहीं!

बजट सत्र की घोषणा और मलमास खत्म होने की तारीख नजदीक आने के साथ ही एक बार फिर इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार का विस्तार करेंगे। वैसे यह चर्चा पिछले करीब डेढ़ साल से चल रही है और हर बार केंद्र में मंत्री पद के दावेदार नेताओं की ओर से ही चलाई जाती है। अब भी चर्चा चली है पर मुश्किल यह है कि सरकार कई तरह के दबावों में है और मंत्रिमंडल विस्तार के लिए 15 से 28 जनवरी तक का समय है। अगर न 13-14 दिनों में विस्तार नहीं होता है तो फिर बजट सत्र खत्म होने यानी आठ अप्रैल के बाद ही सरकार का विस्तार होगा।

बहरहाल, विस्तार जब भी हो पर सबसे खास बात यह है कि इस बार पुराने किसी दावेदार के मंत्री बनने की चर्चा नहीं हो रही है। इससे पहले पिछले डेढ़ साल में जब भी मोदी सरकार के विस्तार की बात चली तो चार-पांच नाम ऐसे थे, जो घूम-फिर कर हर बार चर्चा में आते थे। लेकिन इस बार इनमें से किसी नाम की चर्चा नहीं हो रही है। कुछ नेता तो ऐसे भी हैं, जिनकी चर्चा पिछली सरकार के समय से मंत्री बनने के लिए हो रही है। महाराष्ट्र के राज्यसभा सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे 2016 में सांसद बने थे और तभी से उनके मंत्री बनने की चर्चा चलती रही है।

लेकिन इस बार उनके नाम की चर्चा नहीं है। उनके पिछले महीने दिसंबर में फिर से इंडियन कौंसिल ऑफ कल्चरल रिलेशन यानी आईसीएमआर का चेयरमैन नियुक्ति कर दिया गया। आगे किसी भी समय होने वाले कैबिनेट विस्तार से पहले उनको आईसीएमआर का दोबारा चेयरमैन बनाए जाने के बाद उनकी चर्चा बंद हो गई है। इसी तरह प्रधानमंत्री के करीबी माने जाने वाले राम माधव की चर्चा भी इस बार नहीं हो रही है। वे भी पिछले छह साल से केंद्रीय मंत्री पद के दावेदार हैं। लेकिन उन्हें न तो कहीं से राज्यसभा की सीट मिली है और न जेपी नड्डा की राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है। सो, अभी उनके नाम की चर्चा भी थमी हुई है।

भाजपा के दो और महासचिवों का नाम पिछले कई सालों से संभावित मंत्रियों की सूची में शामिल है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह के करीबी भूपेंद्र यादव और हरियाणा के प्रभारी अनिल जैन का नाम हर बार चर्चा में आता है। लेकिन इस बार ये दोनों नाम भी अटकलों से नदारद हैं। बिहार के प्रभारी के तौर पर भूपेंद्र यादव के काम का इनाम उनको मंत्रिमंडल में शामिल करके दिया जा सकता था। लेकिन कहा जा रहा है कि उनको संभवतः कुछ दिन और संगठन में ही काम करना है। हरियाणा के हालात को देखते हुए इन दिनों अनिल जैन की स्थिति थोड़ी डांवाडोल है और इस बीच पार्टी के संयुक्त सचिव सौदान सिंह को उपाध्यक्ष बना कर हरियाणा का प्रभार भी दे दिया गया है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसलों का एक रिकार्ड यह भी है कि जिनकी चर्चा ज्यादा होती है उनका पत्ता कट जाता है। सो, इस बार चर्चा नहीं हो रही है तो क्या पता किसी की लॉटरी लग जाए!

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