क्षत्रप नहीं बनवा रहे हैं केंद्र में मंत्री

कैबिनेट विस्तार के साथ साथ इस बात की भी चर्चा चल रही है कि इस बार क्या भाजपा की अब एकमात्र बची हुई बड़ी सहयोगी जनता दल यू के केंद्र सरकार में शामिल होगी? तमिलनाडु में अप्रैल-मई में विधानसभा के चुनाव हैं। लेकिन चुनाव से पहले अन्ना डीएमके और भाजपा के बीच तल्खी बढ़ गई है। इसलिए चुनाव से पहले किसी के मंत्री बनने की संभावना कम है। हां, चुनाव के बाद अन्ना डीएमके को केंद्र में जगह मिल सकती है। बहरहाल, चाहे जनता दल यू हो अन्ना डीएमके या कोई दूसरी प्रादेशिक पार्टी, किसी पार्टी के सर्वोच्च नेता नहीं चाहते हैं कि उनकी पार्टी का कोई दूसरा नेता केंद्र में मंत्री बने। केंद्र के साथ सहयोग करने और समर्थन देने के बावजूद क्षत्रप नेता अपने दूसरे नेताओं को केंद्र में मंत्री नहीं बनवा रहे हैं। सोचें, कुछ समय पहले तक सारी प्रादेशिक पार्टियां चाहती थीं कि केंद्र में उसे ज्यादा से ज्यादा प्रतिनिधित्व मिले और अब वे सरकार में शामिल होना नहीं चाहती हैं। इसका अपवाद यह है कि अगर क्षत्रप नेता के परिवार का कोई सदस्य मंत्री बनने वाला हो।

मिसाल के तौर पर बीजू जनता दल को लिया जा सकता है। बीजद पिछले छह साल से भाजपा के प्रति सद्भाव दिखा रही है और संसद में उसका साथ देती है। लेकिन कई बार कहने के बावजूद नवीन पटनायक सरकार में शामिल होने को राजी नहीं हुए। इतना नहीं उन्होंने अपनी पार्टी के लिए लोकसभा स्पीकर या राज्यसभा में उपसभापति का पद भी स्वीकार नहीं किया। इसी तरह जगन मोहन रेड्डी भी सरकार का साथ दे रहे हैं लेकिन सरकार में शामिल होना नहीं चाहते हैं। नीतीश कुमार ने भी ज्यादा प्रतिनिधित्व के नाम पर सरकार में शामिल होना टाल दिया। उनकी पार्टी के नेता नए कपड़े सिलवा कर शपथ लेने का इंतजार करते रहे। के चंद्रशेखर राव जरूर पिछली सरकार में शामिल होना चाहते थे लेकिन वह भी इसलिए क्योंकि उनको अपनी बेटी को मंत्री बनवाना था। यूपीए की सरकार में वे खुद मंत्री थे। असल में क्षत्रपों को इस बात की चिंता रहती है कि किसी को दिल्ली में मंत्री बनवाएं तो उसका कद बढ़ेगा और वह भाजपा के करीब भी जा सकता है। तभी यह सस्पेंस बना हुआ है कि इस बार जब मोदी सरकार का विस्तार होगा तो क्षत्रप अपने नेताओं को मंत्री बनवाएंगे या नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares