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मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार का कयास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। पर कब होगा, इस बारे में मंत्री पद के तमाम दावेदार सिर्फ अटकलें लगा रहे हैं। मंत्री बनने की उम्मीद लगाए एक नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पहले कार्यकाल में तो चार महीने में ही मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया था, इस बार तो छह महीने से ज्यादा हो गए। फिर साथ ही उनका यह भी कहना है कि पहले कार्यकाल में और इसमें बहुत अंतर है। 2014 में नरेंद्र मोदी नए नए प्रधानमंत्री बने थे तो कई लोग उन्हें सलाह देने वाले थे पर अब ऐसा नहीं है।

बहरहाल, अब कहा जा रहा है कि अगले महीने मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। जनवरी के आखिर में संसद का बजट सत्र शुरू होने से पहले नए मंत्रियों की शपथ हो सकती है और कुछ मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं। भाजपा के नेता 14 जनवरी से लेकर 26 जनवरी के बीच मंत्रिमंडल विस्तार का अनुमान लगा रहे हैं। हालांकि कुछ अति उत्साही नेता कह रहे हैं कि संसद का शीतकालीन सत्र खत्म होने के बाद मलमास में ही नए मंत्रियों की शपथ हो सकती है। वे झारखंड की मिसाल दे रहे हैं, जहां नई सरकार मलमास में ही बनेगी। गुजरात में भी सरकार मलमास में ही बनी है।

बहरहाल, मोदी सरकार में फिलहाल प्रधानमंत्री सहित कुल 57 मंत्री हैं, जबकि मंत्रियों की संख्या 81 तक हो सकती है। इस लिहाज से अभी 24 मंत्री बनाए जा सकते हैं। हालांकि मंत्रियों की संख्या 70 से ज्यादा शायद ही होगी। अगर प्रधानमंत्री मोदी मंत्रिमंडल में 70 सदस्य भी रखना चाहें तो 13 नए मंत्री बनेंगे। 13 से ज्यादा नए मंत्री भी बनाए जा सकते हैं।

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मंत्रिमंडल विस्तार की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि कई मंत्रियों के पास दोहरा प्रभार है। कई मंत्रियों के पास तीन-तीन मंत्रालय के प्रभार हैं। शिव सेना के इकलौते मंत्री अरविंद सावंत के इस्तीफे के बाद उनके भारी उद्योग मंत्रालय का प्रभार प्रकाश जावडेकर को मिल गया है। उनके पास पहले से वन व पर्यावरण मंत्रालय है और साथ साथ सूचना व प्रसारण मंत्रालय का भार भी है। इस तरह वे तीन मंत्रालय संभाल रहे हैं।

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के पास संचार और इलेक्ट्रोनिक्स व इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी का मंत्रालय भी है। इसी तरह धर्मेंद्र प्रधान के पास पेट्रोलियम के साथ साथ स्टील मंत्रालय की भी जिम्मेदारी है। पिछली सरकार में बीरेंद्र सिंह स्टील मंत्री थे। स्मृति ईरानी कपड़ा मंत्री हैं और साथ ही उनके पास महिला व बाल विकास मंत्रालय भी है। पिछली सरकार में महिला व बाल विकास की मंत्री मेनका गांधी थीं।

ऐसे ही डॉक्टर हर्षवर्धन के पास स्वास्थ्य के साथ-साथ विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय की भी जिम्मेदारी है। नरेंद्र सिंह तोमर कृषि व किसान कल्याण के साथ साथ ग्रामीण विकास व पंचायती राज जैसा एक और भारी भरकम मंत्रालय संभाल रहे हैं। नितिन गडकरी के पास भी सड़क मंत्रालय के साथ साथ लघु व मझोले उद्योग का मंत्रालय भी है। तभी जल्दी ही नए मंत्री नियुक्त किए जाने की जरूरत बताई जा रही है।

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