फेरबदल या ध्यान भटकाना? - Naya India
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फेरबदल या ध्यान भटकाना?

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में फेरबदल की चर्चा एक बार फिर शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री मंत्रालयों की समीक्षा कर रहे हैं और उनके साथ पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी मौजूद रह रहे हैं। इसका मतलब है कि प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष दोनों मंत्रियों के कामकाज की रिपोर्ट ले रहे हैं ताकि उनके प्रदर्शन का आकलन करके सरकार में फेरबदल का फैसला हो। दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहयोगी दलों के नेताओं से मिल रहे हैं और उनकी मांगों पर विचार कर रहे हैं। मोदी के साथ शाह और नड्डा की बैठक से भी यह संकेत मिला कि सरकार में फेरबदल की तैयारी हो रही है।

लेकिन क्या सचमुच इस बार मोदी सरकार का विस्तार होगा या इस बार की चर्चाएं भी फॉल्स अलार्म साबित होंगी? ध्यान रहे 30 मई 2019 को दूसरी बार शपथ लेने के बाद से ही सरकार में फेरबदल की चर्चा हो रही है। उसके बाद एक एक करके अनेक मंत्रियों के पद खाली हो गए। शिव सेना के अरविंद सावंत और अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल सरकार से बाहर हो गए तो रामविलास पासवान और सुरेश अंगडी का निधन हो गया। एक दर्जन नेता एक या दो से ज्यादा मंत्रालयों के प्रभार संभाल रहे हैं। सरकार में प्रधानमंत्री सहित 81 मंत्री हो सकते हैं लेकिन अभी सिर्फ 55 मंत्रियों से सरकार चल रही है। सरकार में 26 मंत्री पद खाली हैं।

तभी कहा जा रहा है कि मोदी सरकार के विस्तार के लिए आदर्श स्थिति है। मंत्रियों से कामकाज का बोझ कम करना है, सहयोगी पार्टियों को जगह देनी है, लोकसभा चुनाव के बाद से राज्यों में भाजपा के खराब प्रदर्शन को देखते हुए सामाजिक व क्षेत्रीय संतुलन को बेहतर करना है और उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले इन राज्यों के कुछ नेताओं को केंद्र सरकार में जगह देकर सामाजिक समीकरण ठीक करना है। सरकार में फेरबदल के लिए यह सबसे अनुकूल समय माना जा रहा है क्योंकि एक महीने बाद जुलाई में संसद का मॉनसून सत्र शुरू हो जाएगा और उसके बाद पांच राज्यों के चुनाव में बहुत कम समय बचेगा।

सो, इस बार की चर्चा को गंभीर माना जा रहा है। परंतु यह भी संभव है कि सरकार में फेरबदल की चर्चा का मकसद तात्कालिक घटनाओं से ध्यान हटाना हो। इस समय सरकार और भाजपा को मुश्किल में डालने वाली कई घटनाएं हो रही हैं। आर्थिकी को लेकर नए आंकड़े आए हैं और दुनिया की तमाम एजेंसियों ने विकास दर का अनुमान घटाया है। बेरोजगारी और महंगाई के आंकड़े भी आए हैं, जिनसे लोगों की मुश्किलें जाहिर हुई हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण और उससे मरने वालों की संख्या छिपाने को लेकर सरकार घिरी है और इस बीच हर राज्य में भाजपा संगठन व सरकार में खींचतान मची है। इसी बीच मोदी बनाम योगी का विवाद शुरू हुआ और फिर यूपी व केंद्र सरकार में बदलाव की चर्चा चला दी गई। इसका नतीजा यह हुआ है कि पिछले एक हफ्ते से मीडिया का पूरा विमर्श इन दो मसलों पर केंद्रित हो गया है।

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