कश्मीर का अंतरराष्ट्रीयकरण कर रही है सरकार !

जम्मू कश्मीर के मसले पर भारत का हमेशा यह रुख रहा है कि यह भारत और पाकिस्तान के बीच दोपक्षीय मामला है। राज्य का विशेष दर्जा खत्म करने के फैसले को तो पहले दिन से सरकार भारत का आंतरिक मामला बता रही है। इसके बावजूद ऐसा लग रहा है कि खुद भारत सरकार इस मामले का अंतरराष्ट्रीयकरण करने में लगी है। एक तरफ तो कुछ मामलों में सरकार की मजबूरी है क्योंकि कई विश्व नेता इस पर सवाल उठा रहे हैं तो उनका जवाब देना है। जैसे अमेरिका के एक मंत्री ने सवाल उठाया तो विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विरोध किया और तुर्की के राष्ट्रपति ने बयान दिया तो विदेश मंत्रालय ने उनको खूब खरी खरी सुनाई।

पर दूसरी ओर खुद भी भारत सरकार इस मामले का अंतरराष्ट्रीयकरण कर रही है। पांच अगस्त को इसका विशेष दर्जा खत्म करने के बाद पिछले छह महीने में खुद भारत सरकार तीन बार विदेशी नेताओं का प्रतिनिधिमंडल कश्मीर ले जा चुकी है। हाल ही में यूरोपीय संघ के राजनयिकों का एक दल कश्मीर के दौरे पर गया था। इस टीम के सदस्यों ने कश्मीर में जल्दी से जल्दी सामान्य हालात बहाल करने की मांग की। उससे पहले अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर सहित कई विदेशी राजनयिकों का एक प्रतिनिधिमंडल पिछले महीने कश्मीर गया था। उससे पहले भी यूरोपीय संघ का एक प्रतिनिधिमंडल कश्मीर गया था। इससे अपने आप कश्मीर का अंतरराष्ट्रीयकरण हो रहा है।

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