मोदी-शाह की हार है बंगाल में

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हारे हैं। भाजपा तो पिछले विधानसभा चुनाव में तीन सीट जीती थी, जिसमें कई सौ परसेंट का इजाफा हो गया है। दूसरी, बात यह है कि बंगाल में भाजपा चुनाव नहीं लड़ रही थी, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ साथ भाड़े की वह सेना लड़ रही थी, जो तृणमूल कांग्रेस से उधार ली गई थी। इसलिए पश्चिम बंगाल में अगर भाजपा सत्ता से बहुत दूर रह गई है या ममता बनर्जी ने लगातार तीसरी बार भारी-भरकम जीत हासिल की है तो वह मोदी और शाह की हार है।

असल में चुनाव से पहले ही यह तय हो गया था कि भाजपा नहीं लड़ेगी, मोदी और शाह के चेहरे पर बाहर से आए दूसरे नेता लड़ेंगे। इसका नतीजा यह हुआ है कि हर जिले में भाजपा में टूट हो गई। हालांकि यह खबर राष्ट्रीय मीडिया में नहीं दिखाई गई। हर जगह सिर्फ यह दिखाया गया कि ममता बनर्जी की पार्टी टूट रहे है। उसके अमुक विधायक भाजपा में चले गए तो अमुक सांसद भाजपा में चले गए। मीडिया यह नैरेटिव चला कि अमुक जी अधिकारी बहुत बड़े नेता हैं और 60 सीटों पर असर रखते हैं वे भाजपा में चले गए।

हकीकत यह थी कि पूरी भारतीय जनता पार्टी अंदर से टूट रही थी। चूंकि भाजपा के पास बंगाल में विधायक नहीं थे इसलिए विधायक नहीं टूटे। लेकिन हर जिले में पार्टी का संगठन बिखर गया। बाहरी लोगों को टिकट देने से उनमें नाराजगी हुई और उन्होंने भाजपा को छोड़ा। इसके अलावा दर्जनों ऐसे नेताओं ने भाजपा छोड़ी, जो बरसों से चुनाव लड़ने की तैयार कर रहे थे और टिकट बाहर से आए लोगों को मिल गई। इस वजह से पार्टी संगठन और पार्टी के स्थानीय नेता नाराज हुए और उन्होंने या तो घर बैठना उचित समझा या तृणमूल की मदद की।

मोदी और शाह ने प्रचार में वही गलती की, जो उन्होंने दिल्ली में की थी। जिस तरह से दिल्ली में पूरा फोकस अरविंद केजरीवाल पर बना कर आमने-सामने की लड़ाई मोदी और शाह ने बनाई थी वैसी ही लड़ाई उन्होंने बंगाल में भी बना दी, जिसका नतीजा यह हुआ कि लेफ्ट और कांग्रेस का पूरा वोट तृणमूल की ओर चला गया। मोदी और शाह ने अपने ऊपर फोकस बनवा कर भी एक बड़ी गलती की, जिससे ममता बनर्जी को बाहरी और भीतरी का नैरेटिव बनाने में मदद मिली। एक बड़ी गलती ममता बनर्जी को टारगेट करने से हुई। वे देश की इकलौती महिला मुख्यमंत्री हैं और उनके ऊपर निजी हमले या प्रधानमंत्री के उनको चिढ़ाने वाले अंदाज में संबोधित करने से महिलाओं का एकमुश्त वोट उनकी ओर गया। कुल मिला कर लड़ाई मोदी-शाह बनाम ममता की थी, जिसमें ममता ने अकेले व्हील चेयर पर बैठ कर दोनों को हरा दिया।

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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