भागवत का सरकार को पूरा समर्थन!

भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का आपस में अन्योन्याश्रय संबंध है। इसके बावजूद कई मसलों पर दोनों की राय अलग होती है। संघ और उसके अनुषंगी संगठन सरकार की कई नीतियों का विरोध करते हैं। जैसे स्वदेशी जागरण मंच सरकारी कंपनियों को बेचे जाने या श्रम सुधार जैसे कदमों का विरोध करता रहा है। परंतु ऐसा पहली बार हुआ है कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को इतना खुला समर्थन दिया है। उन्होंने संघ के स्थापना दिवस के मौके पर विजयदशमी की रैली में नरेंद्र मोदी सरकार के हर फैसले, हर कदम पर मुहर लगाई। चीन, कृषि कानून, कोरोना, अर्थव्यवस्था किसी भी मसले पर संघ प्रमुख ने सवाल नहीं उठाया।

आमतौर पर यह माना जाता है कि सरकार के हर कदम का समर्थन करना संघ की मजबूरी नहीं है। लेकिन इस बार पूरा समीकरण बदला हुआ दिखा। इस बार संघ प्रमुख ने हर बात का समर्थन किया। यहां तक कि कृषि कानूनों में बदलाव करके बनाए गए तीन नए कानूनों का भी उन्होंने समर्थन किया। देश के कई हिस्सों में किसान आंदोलित हैं। माना जा रहा है कि यह कानून किसानों को कॉरपोरेट का गुलाम बना देगी। कांट्रैक्ट फार्मिग के जरिए विदेशी कंपनियां भी अपना नियंत्रण बनाएंगी और इससे देश की खाद्य सुरक्षा भी प्रभावित होगी। इस कानून की वजह से भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी पार्टी अकाली दल उसे छोड़ कर चली गई है। इसके बावजूद संघ प्रमुख ने कृषि कानूनों का समर्थन किया।

इससे भी हैरान करने वाली बात यह रही कि संघ प्रमुख ने चीन के साथ चल रहे गतिरोध में भी सरकार की तारीफ। भारतीय सेना की तारीफ अपनी जगह है लेकिन उन्होंने सरकार की तारीफ की। भागवत ने कहा कि इस बार भारत ने चीन के सामने तन कर जवाब दिया है और भारत के जवाब से चीन सकते में आ गया है। सवाल है कि क्या संघ प्रमुख को यह हकीकत नहीं पता है कि चीन ने विवाद की कई जगहों पर कब्जा जमाया है और भारत की एक हजार वर्ग किलोमीटर से ज्यादा जमीन कब्जा किए हुआ है? क्या उनको पता नहीं है कि सरकार किस तरह से दब्बूपन के साथ चीन से इस मामले में डील कर रही है?

ऐसा लग रहा है कि आरएसएस इतने भर से खुश है कि भाजपा की सरकार ने उसके दशकों पुराने एजेंडे को पूरा कर दिया। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया गया और अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू हो गया। राम मंदिर निर्माण के शिलान्यास के मौके पर संघ प्रमुख को जो जगह मिली और जैसा सम्मान मिला उसके बाद लगता है कि संघ ने आंख बंद करके मोदी पर भरोसा किया है। अब मोदी सरकार जो करेगी उसे संघ का समर्थन होगा!

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