ज्यादा नहीं बदलेगी नड्डा की टीम!

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा की टीम बन गई है। जानकार सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची बन गई है और राष्ट्रीय कार्यकारिणी भी तय कर दी गई है। साथ ही तमाम प्रकोष्ठ और शाखाओं के बारे में भी फैसला कर लिया गया है, बस अब घोषणा बाकी है। वैसे असली चीज घोषणा ही है। नड्डा को राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हुए पांच महीने हो गए हैं और वे मजे में पुरानी टीम से ही काम चला रहे हैं। वे पुरानी टीम के सभी पदाधिकारियों के साथ बहुत सहजता से काम कर रहे हैं क्योंकि पिछले अध्यक्ष अमित शाह ने ज्यादातर नए लोगों को जिम्मेदारी दी थी, खास कर महासचिवों के मामले में। इसलिए नड्डा को उनसे काम लेने में मुश्किल नहीं आ रही है।

तभी कहा जा रहा है कि नड्डा पुरानी टीम में ज्यादा बदलाव नहीं करेंगे। वैसे भी पार्टी के उपाध्यक्षों में ज्यादा बदलाव होता नहीं है क्योंकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मुख्यमंत्रियों आदि को उसमें रखा जाता है। जैसे अमित शाह ने तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों- शिवराज सिंह चौहान, वसुंधरा राजे और रमन सिंह को एक साथ उपाध्यक्ष बनाया था। उनमें से शिवराज सिंह चौहान फिर मुख्यमंत्री बन गए हैं। कहा जा रहा है कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है। वे पहले भी उपाध्यक्ष रहे हैं। एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस महाराष्ट्र में नेता प्रतिपक्ष हैं। उनको भी दिल्ली लाने की चर्चा है।

बहरहाल, पार्टी के महासचिवों में लगभग सभी युवा और ऊर्जावान नेता हैं। अगर उनमें से किसी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में नहीं शामिल किया जा रहा है तो उन्हें हटाने की गुंजाइश कम है। महासचिवों में बीएल संतोष संगठन महामंत्री हैं। उनको और राम माधव व कैलाश विजयवर्गीय को छोड़ कर बाकी महासचिव- भूपेंद्र यादव, मुरलीधर राव, सरोज पांडेय, अनिल जैन और अरुण सिंह राज्यसभा सांसद हैं। इन सबके बने रहने की संभावना ज्यादा है। इनके अलावा दो नए महासचिव बनाए जा सकते हैं। अभी संगठन महामंत्री सहित आठ महासचिव हैं, यह संख्या दस हो सकती है। इसका मतलब है कि बदलाव की बजाय उपाध्यक्ष और महासचिवों की संख्या बढ़ सकती है। इसके अलावा सचिवों में कुछ बदलाव हो सकता है। बताया जा रहा है कि प्रदेश कमेटियों से पार्टी के केंद्रीय संगठन में सचिव बनाने के लिए नाम मांगे गए हैं। उनमें से कुछ नए नाम सचिवों की सूची में शामिल हो सकते हैं। इसी तरह प्रवक्ताओं में नए चेहरे शामिल हो सकते हैं। पार्टी के कई जानकार नेता मान रहे हैं कि पार्टी की मीडिया टीम कमजोर है। इसके अलावा किसी बड़े बदलाव की गुंजाइश नहीं दिख रही है।

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