गिरती विकास दर, फिर भी बढती समृद्धि!

यह अजीब संयोग है कि जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को चिट्ठी लिख कर अपनी सरकार के दो कार्यकाल के छह साल की उपलब्धियों का वर्णन किया उसी दिन राष्ट्रीय सांख्यिकी विभाग पिछले वित्त वर्ष 2019-20 के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का आंकड़ा भी जारी किया। इसके मुताबिक पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही यानी जनवरी से मार्च में विकास दर महज 3।1 फीसदी रही और इसकी वजह से पूरे साल की विकास दर गिर कर 4।2 फीसदी रह गई। यह आंकड़ा नरेंद्र मोदी सरकार के पहले साल के कार्यकाल के विकास दर के आंकड़ें के ठीक आधा है।

मोदी 2014 की मई में प्रधानमंत्री बने थे और 2015-16 के वित्तीय वर्ष में देश की विकास दर 8।2 फीसदी थी। अगले वित्त वर्ष यानी 2016-17 में इसमें एक फीसदी की गिरावट आई और यह 7।2 फीसदी रह गई। ध्यान रहे उसी साल नोटबंदी लागू हुई थी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विकास दर में एक फीसदी गिरावट की आशंक जताई थी। हालांकि तब प्रधानमंत्री ने हार्वर्ड बनाम हार्डवर्क का जुमला बोल कर कहा था कि हार्वर्ड वाले सारे गलत साबित हो गए। पर विकास दर के बारे में मनमोहन सिंह की आशंका सही साबित हुई।

पर असली गिरावट उसके बाद शुरू हुई। नोटबंदी के अगले साल वाले वित्त वर्ष यानी 2017-18 में विकास दर गिर कर आधा फीसदी और गिर कर 6।7 फीसदी पर आ गई। उसी वित्त वर्ष में वस्तु व सेवा कर, जीएसटी लागू किया गया था। यह सिलसिला जारी रहा और वित्त वर्ष 2018-19 में विकास दर और गिर कर 6।1 फीसदी पर आ गई। इसके बाद का साल भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कयामत का रहा। जिस साल में देश ने नरेंद्र मोदी को दूसरी बार प्रधानमंत्री चुना यानी 2019-20 में विकास दर गिर कर 4।2 फीसदी रह गई। यानी सीधे दो फीसदी की गिरावट आई।

वित्त वर्ष 2019-20 में हुई भारी गिरावट का कोरोना वायरस से कोई खास मतलब नहीं है क्योंकि देश में लागू लॉकडाउन का सिर्फ एक हफ्ता उस वित्त वर्ष में रहा। कोरोना वायरस का असली असर चालू वित्त वर्ष यानी 2020-21 में दिखेगा। भारतीय रिजर्व बैंक तक निगेटिव ग्रोथ की आशंक जता चुका है। यह तय है कि विकास दर शून्य से नीचे जाएगी। सो, यह भी कमाल की बात है कि एक तरफ विकास दर आठ से शून्य पहुंच रही है और दूसरी ओर प्रधानमंत्री देश के समृद्ध होने, सबसे विकास और तरक्की का दावा कर रहे हैं। मानना पड़ेगा, भारत चमत्कारों की भूमि है तभी जीडीपी घटती गई, लोगों की आमदनी गिरती गई और देश समृद्ध होता गया!

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