nayaindia एनसीपी ने शिव सेना से क्यों दिखाया सद्भाव? - Naya India
राजरंग| नया इंडिया|

एनसीपी ने शिव सेना से क्यों दिखाया सद्भाव?

महाराष्ट्र के चुनावी मुकाबले के बीच शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, एनसीपी ने शिव सेना के प्रति सद्भाव दिखाया। पवार के भतीजे अजित पवार ने शिव सेना के सुप्रीमो दिवंगत बाल ठाकरे की गिरफ्तारी को गलत बताया। गौरतलब है कि ठाकरे को सन 2000 में सामाजिक विद्वेष फैलाने और दंगों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वे कभी चुनाव नहीं लड़े पर 1999 में चुनाव आयोग ने उनको छह साल तक चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया था।

बहरहाल, सन 2000 में जब बाल ठाकरे गिरफ्तार हुए थे तब राज्य में कांग्रेस और एनसीपी क नई नई सरकार बनी थी। शिव सेना के लोग मानते रहे हैं कि राजनीति साजिश के तहत बाल ठाकरे को फंसाया गया था। उस घटना के दो दशक बाद अजित पवार ने उसे गलत बताया है। इतना ही नहीं पवार ने इसका ठीकरा अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल पर फोड़ा है। हालांकि शिव सेना के नेता इससे संतुष्ट नहीं हैं और वे चाहते हैं कि एनसीपी के बड़े इसके लिए माफी मांगें।

इसके बावजूद चुनाव के बीच अजित पवार के इस तरह सद्भाव दिखाने को बहुत अहम माना जा रहा है। जानकार सूत्रों का कहना है कि दोनों पार्टियां चुनाव बाद के लिए अपनी पोजिशनिंग कर रही हैं। ध्यान रहे पिछली बार भाजपा और शिव सेना अलग अलग लड़े थे। नतीजों में भाजपा बहुमत से 23 सीट पीछे रह गई थी। तब एनसीपी ने बाहर से समर्थन देकर उसकी सरकार बनवाई थी। इस बार भाजपा 150 सीट लड़ रही है और बहुत अच्छा प्रदर्शन करे तब भी अकेले दम पर बहुमत नहीं हासिल कर सकती है। ऐसे में चुनाव बाद बहुत राजनीति होगी।
शिव सेना अपना मोलभाव करेगी। माना जा रहा है कि उस समय एनसीपी के लिए खुला मैदान होगा। अगर शिव सेना को अच्छी संख्या में सीटे आती हैं और एनसीपी के साथ मिल कर वह बहुमत के आसपास पहुंचती है तो उद्धव ठाकरे किसी शिव सैनिक को मुख्यमंत्री बनाने का दांव इस बार ही चल देंगे। एनसीपी ने इसलिए ही शिव सेना के सामने चारा डाला है। वैसे यह भी कहा जा रहा है कि शिव सेना ज्यादा उछलकूद करेगी तो भाजपा और एनसीपी ही साथ मिल कर सरकार बना सकते हैं। कुल मिला कर स्थिति यह है कि इस बार शरद पवार की पार्टी को किसी तरह से सत्ता में लौटना है। वह कैसे होगा, इसकी गोटियां बिछाई जा रही हैं।

Leave a comment

Your email address will not be published.

eight + 14 =

ट्रेंडिंग खबरें arrow
x
न्यूज़ फ़्लैश
जीएसटी कौंसिल की सिफारिश बाध्यकारी नहीं
जीएसटी कौंसिल की सिफारिश बाध्यकारी नहीं