New Omicron coronavirus variant चुनावों पर न लगे ग्रहण
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चुनावों पर न लगे ग्रहण

UP assembly elections voters

वैसे तो चुनाव आयोग ने सारे तर्क को दरकिनार करके कोरोना वायरस की भयावह दूसरी लहर के बीच आठ चरण में पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव कराया था। कई पार्टियां मांग करती रहीं कि संक्रमितों की बढ़ती संख्या को देखते हुए चुनाव जल्दी खत्म कराया जाए लेकिन आयोग ने सब कुछ तय कार्यक्रम के हिसाब से किया। अगले साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की तैयारी भी आयोग ने शुरू कर दी है और कहा है कि सब कुछ तय कार्यक्रम के हिसाब से होगा। इसलिए चुनाव के कार्यक्रम को लेकर संदेह नहीं करना चाहिए।

परंतु इसी बीच कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने दस्तक दी है और सारी दुनिया इससे दहशत में है। ओमिक्रॉन के बारे में कहा जा रहा है कि यह डेल्टा के मुकाबले छह से सात गुना ज्यादा रफ्तार से फैलता है और वैक्सीन की किसी डोज का इस पर असर नहीं हो रहा है। हालांकि इसके बारे में अभी और अध्ययन किया जा रहा है लेकिन एक आंकड़ा यह है कि अभी तक सबसे ज्यादा तबाही मचाने वाले डेल्टा वैरिएंट को जितना फैलने में एक सौ दिन लगे थे, उतना यह सिर्फ 15 दिन में फैला है। जिस तेजी से यह दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से निकल कर हांगकांग, इजराइल और कई यूरोपीय देशों में पहुंचा है वह निश्चित रूप से चिंता की बात है।

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इस बीच डेल्टा का कहर भी जारी है और सारी दुनिया इसकी चपेट में है। पूरा यूरोप, अमेरिका और एशिया के भी कई देश कोरोना की तीसरी लहर झेल रहे हैं। तभी यह अंदेशा है कि कहीं भारत में भी तीसरी लहर न शुरू हो जाए। हालांकि हो सकता है कि तीसरी लहर पहली दो लहर की तरह भयावह न हो फिर भी चुनाव आयोग को इससे बचने की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। ध्यान रहे कई राज्यों में त्योहारों के बाद केसेज बढ़े हैं। अभी उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा आदि राज्यों में पार्टियों के प्रचार और चुनावी रैलियां शुरू हो गई हैं। यह सही है कि चुनाव आयोग ने अभी चुनाव की घोषणा नहीं की है इसलिए उसकी कोई कानूनी भूमिका अभी नहीं बनी है। फिर भी केंद्र और राज्य सरकार से तालमेल करते हुए आयोग को पहल करनी चाहिए और इसके लिए जरूर कोई पहल करनी चाहिए कि चुनाव पूर्व रैलियों से कोरोना विस्फोट न हो।

कोरोना वायरस का ग्रहण राजनीतिक कारणों से भी चुनावों पर लग सकता है। ध्यान रहे पिछले काफी समय से उत्तर प्रदेश के बारे में यह आशंका जताई जा रही थी कि चुनाव टल सकते हैं क्योंकि भाजपा को वहां हालात अपने अनुकूल नहीं दिख रहे हैं। भाजपा की अपनी अंदरूनी राजनीति के कारण भी इसकी आशंका जताई जा रही थी। तभी अगर कोरोना के कारण उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों के चुनाव में देरी होती है तो उससे विपक्षी पार्टियों का बनाया मोमेंटम बिगड़ेगा।

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