बंगाल में नब्बे के दशक जैसा दृश्य - Naya India
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बंगाल में नब्बे के दशक जैसा दृश्य

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने वैसा दृश्य बना दिया है, जैसा नब्बे के दशक में पूरे देश में होता था। नब्बे के दशक में मंदिर आंदोलन चरम पर था और चारों तरफ जय श्रीराम के नारे सुनाई देते थे। यह नारा उसी समय गढ़ गया था और पूरी तरह से एक राजनीतिक नारा है। हालांकि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद जय श्रीराम की बजाय जय सियाराम कहने लगे हैं। उन्होंने अयोध्या में राममंदिर की नींव रखने के बाद सभा में जय सियाराम का नारा लगाया था। पर नब्बे के दशक में मंदिर आंदोलन से जुड़े नेता जय श्रीराम का ही नारा लगाते थे। इसी नारे पर भाजपा लोकसभा की दो सीट से 89 फिर 161 और फिर 183 सीट पर पहुंची थी। अब यहीं नारा पश्चिम बंगाल में भाजपा की नाव पार लगाएगा।

पश्चिम बंगाल में भाजपा ने जय श्रीराम के नारे को ही मुख्य राजनीतिक नारा बनाया है। इस नारे पर चिढ़ कर ममता बनर्जी ने भाजपा को यह नारा लगाते रहने का और बड़ा कारण दे दिया है। शुक्रवार को ममता बनर्जी विधानसभा में जब बजट पर बोलने खड़ी हुईं तो भाजपा के विधायकों ने जय श्रीराम के नारे लगाए। सोचें, उनमें से भाजपा के अपने तीन ही विधायक थे बाकी विधायक कांग्रेस या ममता की पार्टी से गए हुए हैं। लेकिन अब सब जय श्रीराम के नारे लगा रहे हैं। ऐसे ही 23 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोलकाता में थे, जहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती का कार्यक्रम हो रहा था। उस कार्यक्रम में जब ममता को बोलने के लिए बुलाया गया तो वहां मौजूद लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाए। इससे नाराज होकर ममता बनर्जी एक मिनट से भी कम समय में मंच से उतर गईं। उन्होंने कहा कि उनको अपमानित किया गया है। उसके बाद से भाजपा को यह नारा लगाने का एक बहाना मिल गया है।

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