नितिन पटेल, मनोज सिन्हा और अब धन सिंह! - Naya India
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नितिन पटेल, मनोज सिन्हा और अब धन सिंह!

पता नहीं भारतीय जनता पार्टी और उसका केंद्रीय नेतृत्व जान बूझकर किसी एजेंडे के तहत ऐसा करता है या अनजाने में बार-बार एक ही कहानी दोहराई जा रही है! जब भी राज्यों में मुख्यमंत्री बनाने की बात आती है तो किसी एक नाम की चर्चा शुरू हो जाती है। भारतीय जनता पार्टी कवर करने वाले पत्रकारों का कहना है कि पार्टी की ओर से ही संकेत दिया जाता है कि अमुक जी मुख्यमंत्री बनेंगे। ऐसा दिखाया भी जाता है कि वे मुख्यमंत्री बन रहे हैं। मीडिया में जब खबरें खूब चलने लगती हैं और जिनको संभावित उम्मीदवार बताया जाता है वे पूजा-पाठ करने लगते हैं तो अगले दिन किसी और की शपथ करा दी जाती है। केंद्रीय मंत्रियों, राज्यपालों आदि के मामले में भी ऐसा ही किया जाता है।

मिसाल के तौर पर उत्तराखंड में धन सिंह रावत को शपथ लेनी थी। राज्य सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री रहे धन सिंह रावत को सरकारी हेलीकॉप्टर से देहरादून बुलाया गया। उसके बाद किसी को संदेह नहीं रह गया कि वे मुख्यमंत्री बनेंगे। जो लोग भाजपा के मौजूदा नेतृत्व की कार्यप्रणाली को समझते हैं उनको संदेह था क्योंकि जिसके नाम की ज्यादा चर्चा हो जाती है वह बनता नहीं है। तभी उन्होंने तीन-चार नाम और बताए जैसे अनिल बलूनी, अजय भट्ट, सतपाल महाराज आदि के। लेकिन जब विधायक दल की बैठक हुई तो उसमें तीरथ सिंह रावत को नेता चुन दिया गया। बाद में रावत की पत्नी ने बताया कि जब 2017 के चुनाव में तीरथ सिंह रावत को चौबट्टाखाल विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिली थी तो वे लोग बहुत दुखी हुए थे। उनको विधायक की टिकट नहीं मिली थी पर सीधे मुख्यमंत्री बने।

इसी तरह की कहानी उत्तर प्रदेश में मनोज सिन्हा के साथ हुई थी। फरवरी-मार्च 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद कहा गया कि केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा मुख्यमंत्री बन रहे हैं। मीडिया में खबरें चलने लगीं। वे खुद वाराणसी पहुंच गए और काशी विश्वनाथ के मंदिर में उन्होंने पूजा कर ली। उसके बाद तो और कन्फर्म हो गया कि वे मुख्यमंत्री हो रहे हैं। लेकिन 24 घंटे के अंदर पासा पलट गया और गोरखपुर के तब के सांसद योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला हो गया।

ऐसे ही कुछ गुजरात में हुआ था। विधानसभा चुनाव के बाद चारों तरफ मीडिया में ऐसी खबरें चल रही थीं कि नितिन पटेल मुख्यमंत्री बनेंगे। उन्होंने भी मुख्यमंत्री बनने की तैयारी शुरू कर दी थी और पूजा-पाठ करने लगे थे। पर ऐन मौके पर खेल पलट गया और विजय रूपानी को मुख्यमंत्री बना दिया गया। महाराष्ट्र में ऐसे ही चंद्रकांत पाटिल का नाम कई दिनों तक चर्चा में रहे पर चोरी-छिपे शपथ कराने की बारी आई तो देवेंद्र फड़नवीस को ही दोबारा शपथ कराई गई थी। यह अलग बात है कि चार दिन में ही उनको इस्तीफा देना पड़ा। कई बार ऐसा लगता है कि मीडिया को गलत साबित करने के लिए हर बार कोई एक नाम चलवाया जाता है और बाद में किसी दूसरे को शपथ करा दी जाती है। बहरहाल, कारण जो हो पर सोशल मीडिया में कहा जा रहा है कि धन सिंह रावत उत्तराखंड के मनोज सिन्हा हो गए।

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