No early elections Gujarat गुजरात में समय से पहले चुनाव नहीं
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गुजरात में समय से पहले चुनाव नहीं!

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गुजरात में मुख्यमंत्री बदले जाने के साथ ही अटकलें लगाई जाने लगी थीं कि राज्य में समय से पहले चुनाव हो सकता है। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि चुनाव समय पर ही होंगे। भूपेंद्र पटेल को नया मुख्यमंत्री चुनने से पहले तक दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में किसी को इस बात की खबर नहीं थी कि किसे मुख्यमंत्री बनाया जाएगा पर एक जानकार नेता ने समय से पहले चुनाव को लेकर कहा था कि अगर कोई गैर विधायक मुख्यमंत्री चुना जाता है तो इसका मतलब होगा कि चुनाव अगले साल फरवरी-मार्च में होंगे और अगर कोई विधायक सीएम बनता है तो इसका मतलब है कि समय पर चुनाव होंगे। No early elections Gujarat

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया, पुरुषोत्तम रूपाला, प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल आदि सांसदों के नाम की चर्चा सीएम के लिए चल रही थी। अगर इनमें से कोई मुख्यमंत्री बनता तो छह महीने में उनको विधायक बनाने के लिए उपचुनाव कराना होता। ध्यान रहे वहां एक साल बाद चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में उपचुनाव कराने में तकनीकी और राजनीतिक दिक्कतें होतीं। उत्तराखंड के अनुभव के बाद भाजपा कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। बहरहाल, पार्टी के पहली बार के विधायक भूपेंद्र पटेल के मुख्यमंत्री बनने के बाद समय से पहले चुनाव की संभावना कम हो गई है।

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अगर समय से पहले चुनाव हो तो सबसे ज्यादा दिक्कत कांग्रेस को होती, जिसकी अभी कोई तैयारी नहीं हुई है। यह भी कहा जा रहा है कि चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर कांग्रेस में शामिल होकर गुजरात चुनाव से ही अपना अभियान शुरू करना चाहते हैं। उनका भी मानना है कि चुनाव अगले साल के अंत में होगा तो उन्हें एक साल से ज्यादा का समय मिलेगा और वे बेहतर ढंग से तैयारी कर पाएंगे। अगर भाजपा समय से पहले चुनाव करा देती तो कांग्रेस और प्रशांत किशोर दोनों की योजना धरी रह जाती। गौरतलब है कि प्रशांत किशोर ने चुनाव रणनीतिकार के रूप में अपना करियर गुजरात में 2012 के चुनाव से ही शुरू किया था।

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