प्याज की कीमत खतरे का संकेत


देश भर में प्याज की कीमतों का बढ़ना मामूली बात नहीं है। यह देश की खाद्य सुरक्षा के संकट में आने की शुरुआत है। केंद्र सरकार ने संसद के पिछले सत्र में आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव करके खाने-पीने की ढेर सारी चीजों को इसके दायरे से बाहर कर दिया। दाल, चावल से लेकर तेल और फल-सब्जियों तक को इसके दायरे से निकाल कर कारोबारियों को मनमानी मात्रा में इन वस्तुओं के भंडारण की इजाजत दे दी गई है। देश भर में प्याज, टमाटर, आलू से लेकर दालों की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी इसी का नतीजा है।

यह झूठ फैलाया जा रहा है कि प्याज बाजार में नहीं आया है या बारिश हो गई, जिससे फसल खराब हो गई। न फसल खराब हुई है और न मंडियों में प्याज की आवक कम हुई है, बल्कि इस बार महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज की पिछले साल सितंबर की तुलना में 50 फीसदी से ज्यादा आवक हुई है। इसके बावजूद प्याज के दाम एक सौ रुपए किलो पहुंच गए और सरकारी दुकानों पर प्याज के लिए लोगों की लाइन लगने लगी। दिल्ली में कई जगह प्याज अब राशन में मिल रहा है। जब प्याज की कीमतें बढ़ीं तो सरकार ने इसके स्टोरेज पर सीमा लगा दी। सोचें, पहले सौ जूते खाए जो असीमित स्टोरेज की इजाजत दी और अब सौ प्याज खा रहे हैं, जो वापस स्टोरेज की सीमा तय कर रहे हैं।

आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव की वजह से कैसे प्याज की कीमतों पर असर हुआ है इसे प्याज की आवक के आंकड़ों से समझा जा सकता है। भारत में हर महीने 13 लाख टन प्याज की खपत है। एक तथ्य यह है एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी महाराष्ट्र के लासगांव में इस साल सितंबर में 68 हजार 560 क्विंटल प्याज ज्यादा आया। पिछले साल सितंबर के मुकाबले इस साल सितंबर में लासगांव में 38.84 फीसदी ज्यादा प्याज आया है। अगर महाराष्ट्र की सारी मंडियों की बात करें तो सितंबर के महीने में पिछले साल के मुकाबले 19.23 लाख क्विटंल प्याज ज्यादा आया।

जिस दिन सरकार ने आवश्यक वस्तु कानून को बदला था उस दिन प्याज की कीमत दो हजार रुपए प्रति क्विंटल थी, जो बढ़ कर आठ हजार रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। थोक बाजार में औसतन पांच हजार रुपए क्विटंल की दर से प्याज बिका है और ऐसा प्याज की कमी से बिल्कुल नहीं हुआ है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि सरकार ने मनमाने स्टोरेज की कानूनी रूप से इजाजत दे दी है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ प्याज की कीमतें इसकी वजह से बढ़ रही हैं। प्याज के साथ साथ आलू, टमाटर के दाम भी बढ़ रहे हैं और दाल व तेलों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो रही है। सरकार ने थोड़े समय के लिए स्टोरेज की सीमा तय की है और यह थोड़े समय का संकट नहीं है। या तो सरकार हिम्मत करके अपने कथित सुधारों पर अड़ी रहे और कीमत जितनी भी बढ़ती है, बढ़ने दे या स्थायी तौर पर स्टोरेज की सीमा तय करे।


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