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खुले में शौच से मुक्ति और दिल्ली की हकीकत!

Bathroom became the reason for divorce :

दिल्ली के उप राज्यपाल यह जान कर हैरान रह गए कि अब भी दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग शौच के लिए यमुना के किनारे जाते हैं। असल में वे शुक्रवार की रात को औचक निरीक्षण पर निकले थे और रात में उन्होंने कश्मीरी गेट के रैन बसेरे और उसके आसपास के इलाकों का दौरा किया। उन्होंने देखा कि सैकड़ों लोग सड़कों के किनारे सो रहे हैं या कहीं फ्लाईओवर के नीचे सो रहे हैं। उप राज्यपाल ने लोगों से बात की तो पता चला कि रैन बसेरे में तो कोई छह सौ लोग रहते हैं लेकिन कई हजार लोग बाहर सड़कों पर सोते हैं और शौच के लिए यमुना के किनारे जाते हैं। उप राज्यपाल गए तो थे दिल्ली सरकार के रैन बसेरे की योजना की पोल खोलने लेकिन उन्होंने अनजाने में खुले में शौच से देश के मुक्त होने की घोषणा की पोल भी खोल दी।

सोचें, भारत को कितने समय पहले खुले में शौच से मुक्त देख घोषित कर दिया गया था लेकिन राजधानी दिल्ली में हजारों लोग अब भी खुले में शौच के लिए जाते हैं। अगर उप राज्यपाल किसी दिन यमुना के किनारे के दूसरे इलाकों का दौरा करेंगे या शकूर बस्ती, सराय रोहिल्ला जैसे रेलवे स्टेशनों के आसपास के इलाकों का दौर करेंगे तब पता चलेगा कि कितने लोग अब भी खुले में शौच के लिए जाते हैं। यह राजधानी दिल्ली की हकीकत है। देश के दूसरे हिस्सों और गांवों, कस्बों की बात छोड़ दीजिए। राजधानी में अब भी हजारों नहीं, बल्कि लाखों लोग खुले में शौच के लिए जाते हैं। लेकिन सरकारी कागजों में देश खुले में शौच से मुक्त हो चुका है। इंतजार कीजिए इसी तरह धीरे धीरे देश गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी आदि से भी मुक्त घोषित कर दिया जाएगा।

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