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परमबीर सिंह की पोजिशनिंग!

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह क्या नए सिरे से अपनी पोजिशनिंग कर रहे हैं? उन्होंने राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए लिखी गई चिट्ठी में एक राजनीतिक दांव भी चला है। उन्होंने लिखा है कि अनिल देशमुख उनके ऊपर दबाव बना रहे थे कि दादर व नागर हवेली के लोकसभा सांसद मोहन डेलकर की मौत के मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दायर किया जाए। ध्यान रहे डेलकर की मौत कोई रहस्य नहीं है। यह सबको पता है कि उन्होंने खुदकुशी की थी क्योंकि वे अपने पीछे आठ पन्नों का एक सुसाइड नोट लिख कर गए थे। इसलिए खुदकुशी की जांच की जरूरत नहीं है। जांच की जरूरत उनकी चिट्ठी में लिखी बातों की है। इसलिए अगर परमबीर सिंह अच्छे अधिकारी हैं तो उन पर दबाव डालने की जरूरत ही नहीं थी। उन्हें खुद ही इसी पहलू से मुकदमा दर्ज करना चाहिए था क्योंकि डेलकर ने चिट्ठी में लिखा है कि वे दादर व नागर हवेली के प्रशासक और वहां के अधिकारियों की प्रताड़ना से परेशान थे। सो, मुकदमा स्वाभाविक रूप से आत्महत्या के लिए उकसाने का बनता है और उसी पहलू से जांच की भी जरूरत है।

सवाल है कि परमबीर सिंह ने इस पर क्यों जोर दिया कि अनिल देशमुख उनसे आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज करने को कह रहे थे? वो इसलिए क्योंकि रिटायर होने की कगार पर पहुंचे परमबीर सिंह अपनी नए सिरे से पोजिशनिंग करने की कोशिश में हैं। मोहन डेलकर ने दादर व नागर हवाली के जिस प्रशासक पर आरोप लगाया है वह प्रशासक प्रफुल्ल पटेल हैं, जो गुजरात के बड़े नेता हैं। अमित शाह ने जब अदालती मुकदमों की वजह से गृह राज्य मंत्री का पद छोड़ा था तो इन्हीं प्रफुल्ल पटेल को तब के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृह राज्य मंत्री बनाया था। सो, उनकी जांच नहीं करने की बात करके परमबीर सिंह ने भाजपा को एक मैसेज दिया है। हालांकि वे सुशांत सिंह राजपूत की मौत और न्यूज चैनलों की टीआरपी के मामले में जिस लाइन पर काम कर रहे थे, भाजपा ने उसका विरोध किया था। इसलिए उनके लिए आसान नहीं होगा, भाजपा से करीबी बनाना।

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