विपक्ष की रणनीति कौन बनाएगा?

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण कल से शुरू होगा। बजट पर चर्चा के साथ साथ इस चरण में ढेर सारे विवादित मुद्दे उठने वाले हैं। सबसे ज्यादा विवाद जिस मसले पर देश भर में चल रहा है वह नागरिकता का है। राज्य सरकारें संशोधित नागरिकता कानून, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के विरोध में प्रस्ताव पास कर रही हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि सोमवार से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में ये तीनों मुद्दे मुख्य रूप से उठेंगे। पहले और दूसरे चरण के बीच दिल्ली में बड़ा सांप्रदायिक दंगा हुआ है। इसका मुद्दा भी संसद में उठेगा। पर समझ में नहीं आ रहा है कि विपक्ष का इन मुद्दों पर क्या रुख होगा और वह साझा रणनीति पर काम करेगा भी या नहीं।

कायदे से संसद सत्र में विपक्षी एकजुटता की रणनीति कांग्रेस को बनानी चाहिए। पर कांग्रेस विपक्ष को जुटाने की बजाय अकेले अपनी राजनीति में लगी है। पार्टी ने दिल्ली के दंगों पर कार्यसमिति की बैठक बुलाई और राष्ट्रपति को ज्ञापन देने का फैसला किया। इसमें उसने किसी विपक्षी पार्टी को, यहां तक कि यूपीए की अपनी सहयोगी पार्टियों को भी नहीं शामिल किया। बाद में एनसीपी, राजद आदि दूसरी पार्टियों ने राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी। तृणमूल कांग्रेस अपनी अलग राजनीति कर रही है और ऐसा लग रहा है कि सपा-बसपा को देश की राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। दोनों तय ही नही कर पा रहे हैं कि भाजपा की उग्र हिंदुत्व की राजनीति का मुकाबला कैसे करें- केजरीवाल की तरह चुप्पी साध कर या ममता बनर्जी की तरह लड़ कर! तभी सरकार पूरे भरोसे में है। उसे लग रहा है कि विपक्ष इतना बिखरा है कि उसे कोई समस्या नहीं आनी है।

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