कांग्रेस में संसदीय नियुक्तियों का समय

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इलाज करा कर अमेरिका से लौट आई हैं। पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी दो हफ्ते से उनके साथ थे और वे भी लौट आए हैं। कांग्रेस के जानकार सूत्रों का कहना है कि अब कांग्रेस में एक और फेरबदल की तैयारी हो रही है। असल में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले कांग्रेस संगठन में बड़ी फेरबदल की थी। कई महासचिव बनाए गए थे और कांग्रेस कार्य समिति में उम्र के आधार पर कुछ लोगों की छंटनी करके नए सदस्य मनोनीत किए गए थे। कांग्रेस अध्यक्ष ने छह नेताओं की एक कमेटी बना दी है, जो अगले छह महीने में पार्टी अध्यक्ष का चुनाव कराएगी।

सोनिया गांधी ने सत्र शुरू होने और विदेश रवाना होने से पहले कुछ संसदीय नियुक्तियां भी की थीं। उन्होंने लोकसभा में उप नेता और सचेतक नियुक्त किया था और राज्यसभा में भी सचेतक की नियुक्ति हुई थी। पर दोनों सदनों में नेता पद पर नियुक्ति होनी है। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी को पश्चिम बंगाल का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया है। वहां अगले साल अप्रैल-मई में विधानसभा का चुनाव होना है इसलिए वे बंगाल में ज्याद समय देंगे। उनकी जगह नया नेता नियुक्त होना है। अगर कोई सरप्राइज न हो तो शशि थरूर, मनीष तिवारी या के सुरेश में से किसी को नेता बनाया जा सकता है। हालांकि शशि थरूर और मनीष तिवारी दोनों नेतृत्व को लेकर चिट्ठी लिखने वाले 23 नेताओं में शामिल हैं।

उधर राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद का राज्यसभा का कार्यकाल 15 फरवरी 2021 को खत्म हो रहा है। इसका मतलब है कि संसद के शीतकालीन सत्र और अगले साल बजट सत्र शुरू होने तक वे नेता बने रहेंगे। कांग्रेस में इस बात को लेकर मंथन है कि उनकी जगह नया नेता अभी नियुक्त किया जाए या उनके रिटायर होने के बाद किया जाए। ध्यान रहे उनको हाल ही में पार्टी के महासचिव पद से भी हटाया गया है। संभव है कि शीतकालीन सत्र तक वे नेता रहें और उसके बाद उनकी जगह नया नेता चुना जाए ताकि बजट सत्र के बीच में नया नेता नियुक्त करने की जरूरत न पड़े।

गुलाम नबी आजाद की जगह मल्लिकार्जुन खड़गे को नेता बनाया जा सकता है। सदन में पार्टी के उप नेता आनंद शर्मा ने खुद को जिस तरह से कांग्रेस पार्टी का को-ऑनर बताया है उससे पार्टी के नेता खुश नहीं हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी दूसरी बार राज्यसभा में आए हैं और अगर लोकसभा में दक्षिण भारत के किसी नेता को जिम्मेदारी दी जाती है तो राज्यसभा में उनको नेता बनाया जा सकता है। कांग्रेस को कई राज्यों में प्रदेश अध्य़क्षों की भी नियुक्ति करनी है। कासना आंदोलन की तैयारियों के बीच कांग्रेस को यह काम भी करना है।

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