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Monday, April 19, 2021
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पेट्रोल जीएसटी में आया तो क्या होगा?

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पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जीएसटी कौंसिल से अनुरोध किया है कि पेट्रोलियम उत्पादों को वस्तु व सेवा कर यानी जीएसटी के दायरे में लाया जाए। यह पहला मौका है, जब सत्तापक्ष की ओर से यह बात कही गई है। अब तक विपक्षी पार्टियां भी दबी जुबान से ही इसकी मांग करती थीं। हालांकि सरकार की ओर से भी यह बात इसलिए कही गई है क्योंकि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं और केंद्र सरकार चाहती है कि इसे लेकर आम लोगों में जो नाराजगी है उसका रुख राज्यों की ओर मोड़ा जाए। इसके बावजूद इस पर विचार किया जा सकता है कि अगर पेट्रोलियम उत्पाद जीएसटी के दायरे में आ गए तो क्या होगा? अगर जीएसटी का मौजूदा स्लैब ही रहा तो पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत आधी हो सकती है। अगर सरकार पेट्रोल-डीजल-रसोई गैस के लिए स्लैब बदलती है तब भी कीमतों में बहुत भारी गिरावट आएगी।

जीएसटी का सबसे उच्च स्लैब 28 फीसदी टैक्स है। कुछ लक्जरी या गैर जरूरी उत्पादों पर सरकार 28 फीसदी टैक्स के बाद सेस यानी उपकर भी लगाती है। अगर पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में लाया जाए और उसके ऊपर 50 फीसदी उपकर भी लगाया जाए तब भी इनके दाम आधे हो जाएंगे। इस समय एक लीटर पेट्रोल पर केंद्र और राज्य सरकार दोनों मिल कर करीब दो सौ फीसदी टैक्स ले रहे हैं। एक लीटर कच्चे तेल की कीमत 29 से 30 रुपए लीटर है और रिफाइनिंग, ढुलाई और डीलर कमीशन के बाद भी इसकी कीमत 35 रुपए लीटर से ज्यादा नहीं होती है। अगर उस पर 28 फीसदी टैक्स लगाएं तो टैक्स 10 रुपया पड़ता है और उसके ऊपर 50 फीसदी उपकर हो तो कुल कर 15 रुपए लीटर बैठेगा। तब पेट्रोल की कीमत 50 रुपए लीटर पहुंचेगी। इस समय कई राज्यों में पेट्रोल के दाम एक सौ रुपए लीटर से ज्यादा हो गए हैं। ज्यादातर शहरों में इसकी कीमत 90 रुपए लीटर से ज्यादा हो गई है।

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