पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत क्यों ठहरी है? - Naya India
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पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत क्यों ठहरी है?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 68 डॉलर प्रति बैरल है। पिछले दिनों इसकी कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल हो गई थी पर अब इसमें थोड़ी कमी आई है। जब इसकी कीमत बढ़ रही थी तो पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार इजाफा करने वाली तेल कंपनियां कीमत घटने का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं दे रही है। वैसे जब से कच्चे तेल की कीमत 50 डॉलर से बढ़नी शुरू हुई थी तभी से सरकारी तेल कंपनियां लगातार कीमतों में बढ़ोतरी कर रही थीं। लेकिन अब रोजाना की समीक्षा बंद हो गई है। न कीमतें बढ़ाई जा रही हैं और न कम की जा रही हैं।

सवाल है कि जब भारत सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत पर अपना नियंत्रण छोड़ दिया है तो उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों से जोड़ दिया है तो उस हिसाब से इसमें कमीबेशी होनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। जनवरी और फरवरी में तेल कंपनियों में करीब 20 बार कीमतों में इजाफा किया लेकिन मार्च के पहले हफ्ते के बाद इसे स्थिर कर दिया गया है। कीमतों की समीक्षा नहीं हो रही है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है। जाहिर है पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की वजह से सरकार ने कीमतों की समीक्षा रूकवाई है। ऐसे में इस तमाशे का क्या मतलब है कि कीमत बाजार के हवाले है? सरकार जब चाहे तब कीमतों की समीक्षा रूकवा सकती है इसका सीधा मतलब है कि कीमतें अब भी सरकार के नियंत्रण में हैं। जब तक चुनाव हो रहे हैं तब तक कीमतों की रोजाना की समीक्षा रूकी रहेगी और चुनाव के बाद लगातार दाम बढ़ा कर कंपनियां अपना खजाना भरेंगी।

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