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Wednesday, May 12, 2021
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लेफ्ट की नहीं विजयन की जीत

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केरल में सीपीएम के नेतृत्व वाला लेफ्ट मोर्चा जीता है या मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन की जीत हुई है? यह लाख टके का सवाल है। लेफ्ट पार्टियों को जानने वाले कहेंगे कि सीपीएम और सीपीआई जैसी काडर आधारित पार्टी में यह नहीं कहा जा सकता है कि एक व्यक्ति की जीत हुई है। लेकिन हकीकत यही है कि केरल की जीत लेफ्ट मोर्चे की नहीं, बल्कि विजयन की निजी जीत है। अगर लेफ्ट मोर्चा चुनाव नहीं जीत पाता तब भी वह हार विजयन की होती और पार्टी के अंदर से लेकर बाहर तक इसका ठीकरा उनके ऊपर फोड़ा जाता। ऐसा इसलिए होता क्योंकि पहली बार ऐसा हुआ कि किसी राज्य के चुनाव से पहले किसी कम्युनिस्ट नेता के ऊपर इस तरह का फोकस बना, जैसा केरल के मुख्यमंत्री के ऊपर बना था।

चुनाव की घोषणा से पहले ही यह तय हो गया था कि इस बार केरल का चुनाव कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ का मुकाबला पिनरायी विजयन की सरकार से है। विजयन को चुनाव से पहले ही कैप्टेन विजयन कहा जाने लगा था। यह भी लेफ्ट की राजनीति में पहली बार हुआ कि पार्टी के प्रदेश सचिव और संगठन के नेताओं की बजाय मुख्यमंत्री को कैप्टेन माना गया। असल में कोरोना वायरस से लड़ने की अपनी सरकार की अच्छी और सच्ची रणनीति ने विजयन को कैप्टेन बनाया था। उन्होंने कोरोना से जंग में भी कैप्टेन की भूमिका निभाई और चुनाव में भी वे कैप्टेन की तरह लड़े।

ध्यान रहे केरल देश का सर्वाधिक संक्रमित दूसरा राज्य है। इसके बावजूद वहां न तो इलाज के लिए हाहाकार है और न दवा, ऑक्सीजन के लिए। विजयन ने कोराना का बेहतरीन प्रबंधन किया और इस दौरान लोगों को हो रही आर्थिक तकलीफों को दूर करने के लिए बड़ा आर्थिक पैकेज भी दिया। इसी वजह से 44 साल का इतिहास बदला। साढ़े चार दशक में पहली बार ऐसा हुआ कि पांच साल में सत्ता नहीं बदली।

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