चंदा पीएम केयर्स में, धन्यवाद करेगी भाजपा!

कोरोना वायरस के संक्रमण से लड़ने, गुणवत्तापूर्ण इलाज और शोध को बढ़ावा देने के घोषित उद्देश्य के साथ बनाए गए पीएम केयर्स फंड को लेकर लगातार खबरें आ रही हैं। सूचना के अधिकार कानून के तहत बेंगलुरू के अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के कानून के छात्र ने पीएम केयर्स फंड के बारे में कुछ सूचना मांगी थी। उसने खासतौर से इस ट्रस्ट के डीड्स और सरकारी अधिसूचना की कॉपी मांगी थी। लेकिन उसके जवाब में कहा गया है कि पीएम केयर्स फंड सूचना के अधिकार कानून के तहत आने वाला सरकारी प्राधिकरण नहीं है। जवाब में यह भी कहा गया कि जरूरी सूचनाएं इसकी वेबसाइट पर दी गई हैं। हालांकि वेबसाइट पर सरकारी अधिसूचना या इस ट्रस्ट के निर्माण से जुड़े कागज नहीं है।

इसकी वेबसाइट पर यह भी बताया गया है कि इसकी ऑडिट का फैसला इसके ट्रस्टी करेंगे और उनके चुने हुए एक या ज्यादा स्वतंत्र ऑडिटर इसकी जांच कर सकेंगे। इसका मतलब यह है कि सीएजी से इसकी ऑडिट नहीं होगी और संसद में रिपोर्ट नहीं पेश होगी। इन खबरों के बीच यह भी खबर आई है कि कोरोना वायरस का संक्रमण शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री के बनाए इस फंड में चंदा देने वालों का भारतीय जनता पार्टी धन्यवाद ज्ञापन करेगी। सवाल है कि चंदा जब पीएम केयर्स फंड में दिया गया है और प्रधानमंत्री खुद इसमें चंदा देने वालों का धन्यवाद कर रहे हैं तो भाजपा अलग से क्यों धन्यवाद करेगी? यह चंदा कोई भाजपा के फंड में नहीं दिया गया है फिर उसके धन्यवाद का क्या मतलब है? वैसे भाजपा देश की सबसे अमीर पार्टी है पर पीएम केयर्स में उसने कोई चंदा दिया है इसके बारे में कोई खबर नहीं आई है।

बहरहाल, माना जा रहा है कि पीएम केयर्स में चंदा देने वालों को धन्यवाद देकर भाजपा अपनी पहुंच एक बिल्कुल नए समूह में बनाना चाहती है। यह नया समूह भाजपा के पारंपरिक समर्थकों और उसके कार्यकर्ताओं से अलग है। ध्यान रहे कोरोना वायरस से लड़ने के लिए पीएम केयर्स फंड में बड़ी संख्या में आम लोगों ने चंदा दिया है। ऐसे लोगों ने भी जो किसी राजनीतिक विचारधारा के समर्थक या विरोधी नहीं हैं, ऐसे मध्य वर्ग के लोगों ने अपनी क्षमता के हिसाब से इस फंड में चंदा दिया है। भाजपा को लग रहा है कि इनकी सहानुभूति या समर्थन भाजपा के पक्ष में हासिल किया जा सकता है। हालांकि भाजपा के धन्यवाद ज्ञापन करने की खबर आने के बाद इसे लेकर राजनीतिक सवाल उठने लगे हैं।

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