राजनीति

क्या क्या नहीं कहा पीएम ने?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट के दौर में 20 मार्च से 12 मई तक चार बार देश को संबोधित किया और एक बार वीडियो संदेश जारी किया। इस तरह कुल मिला कर पांच संबोधन हुए। 12 मई का पांचवां संबोधन सबसे ताजा है, जिसमें उन्होंने 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया। इसमें उन्होंने आत्मनिर्भरता और वोकल फॉर लोकल का जुमला दिया। करीब 35 मिनट के भाषण में उन्होंने क्या क्या कहा और उनके कहे का क्या मतलब है, इसकी व्याख्या मंगलवार की रात से ही हो रही है। लेकिन इसके साथ ही यह देखना भी जरूरी है कि इस भाषण में क्या क्या जरूरी बातें हैं, जो उन्होंने नहीं कही।

सबसे पहले जरूरी बात प्रवासी मजदूरों का संकट है, जिस पर उनके बोलने की उम्मीद उनके सबसे घनघोर समर्थक और घनघोर विरोधी सब कर रहे थे। सोशल मीडिया में यह मजाक भी चल रहा था कि प्रवासी मजदूरों की बात करते हुए प्रधानमंत्री भावुक होंगे या नहीं। पर हैरानी की बात है कि प्रधानमंत्री ने इस बारे में कुछ नहीं कहा। लाखों मजदूर सड़क पर चल रहे हैं, बीमार होकर, भूख से या कुचल कर चार सौ के करीब मजदूर मर चुके हैं। आजाद भारत के इतिहास का सबसे बड़ा विस्थापन हो रहा है पर प्रधानमंत्री ने उस बारे में कुछ नही कहा। यहां तक कि भारतीय रेल ने पिछले एक हफ्ते से मजदूरों को उनके घर पहुंचाना शुरू किया है, इसका भी श्रेय नहीं लिया।

इसी तरह पीएम केयर्स फंड के बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा। राष्ट्र के नाम संबोधन में ही उन्होंने यह फंड बनाने की घोषणा की थी। तब से इसे लेकर दस तरह के सवाल उठ रहे हैं। लोग उनके प्रधानमंत्री बनने से पहले से भाषण का वीडियो शेयर कर रहे हैं, जिसमें वे कह रहे हैं कि दिल्ली को जनता की पाई-पाई का हिसाब देना चाहिए। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार पीएम केयर्स फंड की ऑडिट की मांग कर रहे हैं। पर प्रधानमंत्री ने इस बारे में कुछ नहीं कहा। न यह बताया कि इसमें कितना पैसा आया है और न यह बताया कि उसे कहां खर्च किया जा रहा है। यहां तक कि हजारों करोड़ रुपए का चंदा देने के लिए लोगों का आभार तक नहीं जताया।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कोरोना वायरस से लड़ाई के बारे में भी कुछ नहीं कहा। उन्होंने पहले संबोधन में कहा था कि 21 दिन में जंग जीत ली जाएगी। दूसरे संबोधन में इसे बढ़ा कर 40 दिन किया। लेकिन 50 दिन के बाद जब वे पांचवीं बार संबोधित करने आए तो कुछ बताया ही नहीं कि उस जंग का क्या हुआ, हम जीते या अभी जंग चल रही है और चल रही है तो कब तक चलेगी और उसे जीतने के लिए सरकार क्या कर रही है? वे टेस्टिंग, मरीजों की संख्या, स्वास्थ्य सुविधाओं आदि किसी के बारे में कुछ भी नहीं कहा।

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