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जदयू क्या केंद्र सरकार में शामिल होगी?

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में कब फेरबदल होगी? यह लाख टके का सवाल है। इसी महीने संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है और जब सत्र खत्म होगा उसके बाद मलमास शुरू हो जाएगा। सो, एक चर्चा 18 नवंबर से पहले फेरबदल की है और दूसरी 15 जनवरी से लेकर संसद का बजट सत्र शुरू होने से पहले तक की है। हालांकि नरेंद्र मोदी की खासियत यह है कि वे मीडिया में चलने वाली चर्चाओं को सप्रयास गलत साबित करते हैं। इसलिए पक्के तौर पर इसकी टाइमिंग के बारे में कोई कुछ नहीं कह सकता है। इस बीच बिहार में यह चर्चा शुरू हो गई है कि जनता दल यू को सरकार में जगह मिलने वाली है।

असल में दोनों पक्षों की ओर से इसकी पहल की गई है। ध्यान रहे मई में जब नरेंद्र मोदी की सरकार दूसरी बार बनी तो जदयू की ओर से एक मंत्री बनने का प्रस्ताव था। जदयू की ओर से राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह इसके लिए तैयार भी हो गए थे पर ऐन मौके पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे सांकेतिक प्रतिनिधित्व नहीं चाहते हैं। जदयू नेताओं का कहना था कि जिस पार्टी के एक या दो सांसद हैं उनका भी एक मंत्री बनेगा और जिसके 17 सांसद हैं उसका भी एक बनेगा, ये ठीक नहीं है।

इसके बाद करीब पांच महीने तक चुप्पी के बाद पिछले दिनों जदयू की दिल्ली में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी की ओर से खुल कर कहा गया कि पार्टी को संख्या के हिसाब से आनुपातिक प्रतिनिधित्व मिले तो वह सरकार में शामिल होगी। जानकार सूत्रों का कहना है कि दोनों पार्टियों के नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद ही जदयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने यह बयान दिया है। अगर भाजपा पर्याप्त संख्या में मंत्री बनाने को तैयार नहीं होती तो पार्टी की ओर से यह बयान नहीं दिया जाता। यह भी कहा जा रहा है कि अगले साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनावों को देखते हुए अब नीतीश कुमार भी चाहते हैं कि केंद्र में उनके मंत्री हों और कुछ अन्य जातियों को प्रतिनिधित्व मिले।

सो, इस आधार पर पटना में जदय़ू के सांसद शपथ की तैयारी में जुट गए हैं। राज्यसभा में पार्टी के नेता आरसीपी सिंह और लोकसभा में पार्टी के नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के मंत्री बनने की चर्चा है। ध्यान रहे पिछली बार आरसीपी सिंह इस वजह से भी मंत्री बनते बनते रह गए थे क्योंकि ललन सिंह को मौका नहीं मिल रहा था। इसलिए इस बार आरपीसी खुद भी चाहेंगे कि ललन सिंह मंत्री बनें ताकि पार्टी के सरकार में शामिल होने में कोई अड़ंगा न लगे। कहा जा रहा है कि जदयू की ओर से तीन मंत्री बन सकते हैं। नीतीश कुमार तीसरे मंत्री के लिए किसी कुशवाहा सांसद का या अति पिछड़ी जाति से आने वाले किसी सांसद का नाम आगे बढ़ा सकते हैं।

By वेद प्रताप वैदिक

हिंदी के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले पत्रकार। हिंदी के लिए आंदोलन करने और अंग्रेजी के मठों और गढ़ों में उसे उसका सम्मान दिलाने, स्थापित करने वाले वाले अग्रणी पत्रकार। लेखन और अनुभव इतना व्यापक कि विचार की हिंदी पत्रकारिता के पर्याय बन गए। कन्नड़ भाषी एचडी देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने उन्हें भी हिंदी सिखाने की जिम्मेदारी डॉक्टर वैदिक ने निभाई। डॉक्टर वैदिक ने हिंदी को साहित्य, समाज और हिंदी पट्टी की राजनीति की भाषा से निकाल कर राजनय और कूटनीति की भाषा भी बनाई। ‘नई दुनिया’ इंदौर से पत्रकारिता की शुरुआत और फिर दिल्ली में ‘नवभारत टाइम्स’ से लेकर ‘भाषा’ के संपादक तक का बेमिसाल सफर।

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