modi attacks opposition familialism हर जुमले की व्याख्या जरूरी है
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हर जुमले की व्याख्या जरूरी है

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प्रधानमंत्री ने राजनीति में परिवारवाद की नई व्याख्या की है। पिछले सात साल से वे परिवारवाद को गालियां देते रहे और कई राजनीतिक परिवारों को फलने-फूलने में मदद भी करते रहे। अब उन्होंने नई परिभाषा देते हुए कहा है कि एक ही परिवार को दो या उससे ज्यादा लोग मेरिट पर राजनीति में आएं तो इसमें कुछ गलत नहीं है यानी वह परिवारवाद नहीं है। उनके मुताबिक एक ही परिवार पार्टी की पूरी राजनीति को कंट्रोल करे तो वह परिवारवाद है। इस परिभाषा के मुताबिक सिंधिया परिवार, कल्याण सिंह परिवार, धूमल परिवार, साहिब सिंह परिवार, रमन सिंह परिवार, बंगाल के अधिकारी परिवार आदि के सदस्यों को परिवारवाद की राजनीति में नहीं माना जाएगा। लेकिन सवाल है कि दुष्यंत चौटाला, कॉनरेट संगमा, चिराग पासवान जैसे अपने सहयोगियों, उद्धव ठाकरे व चंद्रबाबू नायडू जैसे पुराने सहयोगियों, जगन मोहन रेड्डी या नवीन पटनायक जैसे अपने अघोषित सहयोगियों के बारे में क्या कहना है? क्या ये लोग भी लोकतंत्र के लिए खतरा हैं?

बहरहाल, इससे पहले प्रधानंमत्री मोदी ने कांग्रेस मुक्त भारत के अपने जुमने की व्याख्या की थी। उन्होंने कई बरस तक कांग्रेस मुक्त भारत की बात करने के बाद कहा था कि उनका मतलब कांग्रेस को खत्म करना नहीं, बल्कि कांग्रेस परंपरा और कांग्रेस की राजनीति संस्कृति से देश को मुक्त कराना है। इससे भी पहले हर नागरिक के खाते में 15-15 लाख रुपए आ जाने के जुमले की व्याख्या अमित शाह ने की। उन्होंने देश के लोगों को समझाया कि यह बात कहने का तरीका है, एक जुमला है, हकीकत नहीं है। सवाल है कि सूत्र वाक्य में अपनी बात कहते समय ही क्यों नहीं लोगों को उसका असली मतलब भी समझा दिया जाता है? बाद में अपनी सुविधा से व्याख्या क्यों की जाती है?

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