मोदी ने संबोधन में देरी क्यों की?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में इतना समय क्यों लिया? बुधवार की शाम को सरकार की ओर से कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी गुरुवार को रात आठ बजे देश को संबोधित करेंगे। सवाल है कि बुधवार को ही क्यों नहीं उन्होंने देश को संबोधित कर दिया या गुरुवार की सुबह क्यों नहीं किया? जब भारत ने अंतरिक्ष में मिसाइल मार गिराने की क्षमता हासिल की थी तब प्रधानमंत्री मोदी ने सुबह ही देश को संबोधित किया था। उसी तरह इस मामले में भी सुबह ही उनका संबोधन हो सकता था। पर उन्होंने इसके लिए 24 घंटे का समय लिया और समय भी तय किया तो रात आठ बजे का। ध्यान रहे उन्होंने आठ नवंबर 2016 को जब नोटबंदी का ऐलान किया था तब भी रात आठ बजे ही देश को संबोधित किया था।

तभी जैसे ही बुधवार को खबर आई कि प्रधानमंत्री गुरुवार की रात आठ बजे देश को संबोधित करेंगे वैसे ही तरह तरह की अटकलों का दौर शुरू हो गया। सबसे पहले यह अटकल लगाई गई कि प्रधानमंत्री पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा कर सकते हैं। यह अफवाह इतनी तेजी से फैली कि जिन मॉल्स और दुकानों में शाम सात बजे तक कोई ग्राहक नहीं था, वहां आठ-नौ बजे रात को लंबी लाइनें लग गईं। लोग कई महीनों का राशन खरीदने लगे। दुकानों में सामान खत्म हो गए। दवा की दुकानों पर लोगों की भीड़ जुट गई। बैंकों के एटीएम के आगे लोगों की लाइनें लग गईं। गुरुवार को पूरे दिन देश भर में एक तरह का पागलपन छाया रहा। सरकार की ओर से सफाई देने का भी असर नहीं हुआ। ऊपर से जब राष्ट्र के नाम संबोधन हुआ तो उसमें कोई ऐसी बात नहीं कही गई, जो पहले नहीं कही जा सकती थी। कोई ऐसी बात नहीं थी, जिसकी घोषणा के लिए बड़ी तैयारी की जरूरत थी। तभी सवाल उठता है कि उन्होंने संबोधन के लिए इतना समय क्यों लिया?

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