राज्यपालों का विपक्षी सरकारों से टकराना - Naya India
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राज्यपालों का विपक्षी सरकारों से टकराना

राज्यों में राजनीतिक व्यक्तियों को राज्याल नियुक्त करने की परंपरा पुरानी है। जब तक केंद्र और ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस की सरकार होती थी तब राज्यपाल और मुख्यमंत्रियों में टकराव नहीं होता था। पर अब पिछले कुछ समय से राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ गई हैं और इस वजह से केंद्र व राज्य में भी तनातनी ज्यादा हो गई है। केंद्र में दस साल यूपीए की सरकार के समय भी ऐसा हुआ और अब एनडीए की सरकार में भी ऐसा हो रहा है। कम से कम आधा दर्जन राज्यों में राज्यपालों के कामकाज से राज्य सरकारें परेशान हैं। सबसे ज्यादा तनाव पश्चिम बंगाल, केरल और पुड्डुचेरी में दिख रहा है। महाराष्ट्र से लेकर पूर्वोत्तर तक कई राज्यों से भी ऐसी खबरें आई हैं। पर असली टकराव इन तीन राज्यों में है। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के साथ नागरिकता कानून पर राज्य सरकार की ठनी है। राज्य सरकार ने उनसे पूछे बगैर नागरिकता कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसका उन्होंने विरोध किया। अब उन्होंने कहा है कि वे विधानसभा सत्र में राज्य सरकार की ओर से तैयार किए गए अभिभाषण में नागरिकता कानून से बारे में लिखा गया पैराग्राफ नहीं पढ़ेंगे। इसे लेकर विवाद छिड़ा हुआ है।

पश्चिम बंगाल में राज्यपाल जगदीप धनकड़ से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का रोज का विवाद दिख रहा है। कई मसलों पर दोनों में तनाव रहा है और पिछले दिनों दो विश्वविद्यालयों में राज्यपाल का विरोध किया गया। पुड्डुचेरी के मुख्यमंत्री नारायण सामी का वहां की उप राज्यपाल किरण बेदी से रोजमर्रा के कामकाज को लेकर टकराव है। कुछ समय पहले तक जैसे दिल्ली में नजीब जंग से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का टकराव होता था वैसा पुड्डुचेरी में चल रहा है।

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