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ये सब भाजपा के मददगार!

BJP followed arvind kejriwal

कांग्रेस पार्टी के नेता और सोशल मीडिया में उसके समर्थक ममता बनर्जी और उनके चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर के पीछे पड़े हैं। सब उनको भाजपा को एजेंट बताने में लगे हैं। कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी और उनकी टीम भाजपा का एजेंडा पूरा कर रही है। बड़े बड़े विद्वानों के हवाले बताया जा रहा है कि जो भी व्यक्ति इस समय कांग्रेस से अलग होकर कोई मोर्चा बनाने की बात कर रहा है वह असल में अमित शाह की बी टीम के तौर पर काम कर रहा है। क्या सचमुच ऐसा है? क्या अलग पार्टी बना कर या अलग मोर्चा बना कर लड़ना भाजपा का एजेंडा पूरा करना है? फिर तो सब भाजपा का ही एजेंडा पूरा कर रहे हैं! politics helpers of BJP

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी जो कर रही है वह क्या है? क्या वह भाजपा का एजेंडा पूरा करना नहीं है? पाला बदलने को तैयार कांग्रेस पार्टी के नेताओं का यह तर्क है। उनका कहना है कि अपने अलावा हर पार्टी को भाजपा का एजेंट बता कर असल में कांग्रेस समूचे विपक्ष को कमजोर कर रही है। क्या कांग्रेस को यह ध्यान नहीं है कि उसने हाल में बिहार में दो सीटों के उपचुनाव में अपना उम्मीदवार उतारा, जिसकी वजह से राजद को नुकसान हुआ और दोनों सीटों पर जनता दल यू की जीत हुई? पश्चिम बंगाल में सबको पता था कि ममता बनर्जी और भाजपा के बीच आमने सामने का मुकाबला है फिर भी कांग्रेस ने लेफ्ट मोर्चा और पीरजादा अब्बास की पार्टी के साथ मिल कर चुनाव लड़ा था, क्या वह भाजपा का एजेंडा था?

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इसका मतलब है कि अगर किसी ने कांग्रेस को केंद्रीय ताकत नहीं माना और यह स्वीकार नहीं किया कि उसी के नेतृत्व में भाजपा से लड़ा जा सकता है तो वह भाजपा की बी टीम माना जाएगा। यहीं सोच उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की है। उसके नेता खुलेआम आरोप लगाते हैं कि बहुजन समाज पार्टी भाजपा का एजेंडा पूरा कर रही है। अब सोचें, सपा के साथ लड़ कर भी बसपा ने क्या कर लिया? लेकिन अकेले लड़ेगी तो वह भाजपा का एजेंडा पूरा करना होगा, तो क्या बसपा चुनाव नहीं लड़े?

आम आदमी पार्टी उत्तराखंड और गोवा में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है तो कांग्रेस का आरोप है कि वह भाजपा का एजेंडा पूरा कर रही है। सोचें, आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में दो बार विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराया और पंजाब में मुख्य विपक्षी पार्टी है, लेकिन कांग्रेस के हिसाब से उसे बाकी कहीं जाकर चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। वह दिल्ली में लड़ी तभी तो जीती या पंजाब में लड़ी तो मुख्य विपक्षी पार्टी बनी, फिर उसे क्यों नहीं दूसरे राज्यों में लड़ना चाहिए? बहरहाल, अगर विपक्षी पार्टियों की मानें तो सब भाजपा का एजेंडा पूरा कर रहे हैं। कहीं कांग्रेस कर रही है तो कहीं तृणमूल कर रही है, कहीं बसपा कर रही है तो कहीं आप और एनसीपी कर रहे हैं।

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