बिहार चुनाव के पहले फिर आरक्षण विवाद

एक बार फिर आरक्षण का विवाद शुरू हो गया है। इस बार अदालती आदेश से विवाद शुरू हुआ और कांग्रेस व भाजपा दोनों इस बात के लिए लड़ रहे हैं कि इस विवाद के लिए जिम्मेदार कौन है। भाजपा का आरोप है कि 2012 में जब उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार थी तब उसने प्रमोशन में आरणक्ष देने से इनकार किया था, जिसकी वजह से मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में भाजपा की मौजूदा सरकार ने कहा कि वह प्रमोशन में आरक्षण नहीं देगी, जिसके बाद सर्वोच्च अदालत का फैसला आया कि प्रमोशन मं आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है और राज्य इसे देने के लिए बाध्य नहीं हैं।

ध्यान रहे दो साल पहले इसी तरह एससी, एसटी उत्पीड़न कानून में बदलाव करने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया था। उस पर विवाद हुआ तो सरकार समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट गई और फिर कानून के पुराने प्रावधानों को बहाल करने के लिए संशोधन विधेयक भी संसद से पास किया। उसी तरह का विवाद अब प्रमोशन में आरक्षण के मसले पर हो रहा है। सरकार इसमें भी बदलाव के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी और अगर जरूरत पड़ी जैसा कि भाजपा की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने कहा है, तो सरकार अदालत का आदेश पलट करके इस मामले को नौवीं अनुसूची में भी डाल सकती है।

इस बीच इस मसले पर राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस ने 16 फरवरी को प्रदर्शन का ऐलान किया है तो भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद ने 23 फरवरी को भारत बंद की अपील की है। ध्यान रहे इसी साल बिहार में चुनाव होने वाले हैं, जहां आरक्षण हमेशा राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा रहा है। मंडल आयोग से ठीक पहले और उसके बाद के 30 सालों में जातिवादी राजनीति की असली प्रयोगशाला बिहार ही रही है। हो सकता है कि उससे पहले यह मसला निपट जाए पर बिहार में यह चुनावी मुद्दा बनेगा।

बिहार के पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का आरक्षण की समीक्षा वाला बयान आया था, जिस पर लालू प्रसाद और नीतीश कुमार ने अपने पूरे प्रचार की थीम बना दी। ‘आरक्षण बचाना’ पिछले चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा था। इस बार भी अभी से विवाद शुरू हो गया है। हालांकि इस बार नीतीश कुमार भाजपा के साथ हैं और लालू प्रसाद जेल में हैं। फिर भी नवंबर में होने वाले चुनाव से पहले इसका मुद्दा बनेगा और भले सरकार इसमें जरूरी सुधार कर दे फिर भी भाजपा के लिए इसका जवाब देना आसान नहीं होगा।

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