कांग्रेस मुक्त भारत में भाजपा तो सीपीएम भी! - Naya India
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कांग्रेस मुक्त भारत में भाजपा तो सीपीएम भी!

वैसे तो कांग्रेस पार्टी का भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी यानी सीपीएम के साथ पश्चिम बंगाल में तालमेल है। सिर्फ सीपीएम के साथ ही नहीं, बल्कि सभी कम्युनिस्ट पार्टियों के मोर्चे के साथ मिल कर कांग्रेस विधानसभा चुनाव लड़ रही है। लेकिन वहां से बहुत दूर केरल में उन्हीं वामपंथी पार्टियों का मोर्चा और कांग्रेस एक-दूसरे के खिलाफ घमासान लड़ाई लड़ रहे हैं। कई लोग इसे भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती बता सकते हैं पर असल में यह भारतीय लोकतंत्र की विद्रूपता है। देश के आम नागरिकों और मतदाताओं को सनातन रूप से बेवकूफ मानने की सोच का प्रतीक है। हैरानी की बात है कि दोनों जगह वैचारिक-सैद्धांतिक तर्कों के नाम पर इसे सही भी ठहराया जा रहा है।

लेकिन इस तालमेल या आमने-सामने चुनाव लड़ने के मामले में क्या दोनों पार्टियां एक-दूसरे के प्रति ईमानदार हैं? असल में इन दोनों पार्टियों- कांग्रेस और सीपीएम की इस विद्रूप राजनीति में भाजपा अपना फायदा देख रही है और फायदा उठा भी रही है। केरल में भाजपा को पता है कि उसे कुछ भी हासिल नहीं होना है। पिछली बार वहां उसे एक सीट मिली थी, जिसे इस बार थोड़ा बढ़ाने का लक्ष्य है। लेकिन उसके साथ साथ भाजपा का दूसरा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कांग्रेस पार्टी किसी तरह से नहीं जीते। केरल फ्लिप स्टेट है यानी पांच साल में वहां सत्ता बदल जाती है। इस लिहाज से इस बार कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के सत्ता में आने की बारी है। पर भाजपा का काडर इस बात के लिए भरपूर परिश्रम कर रहा है कि किसी तरह से कांग्रेस न जीते। भाजपा का काडर कांग्रेस के वोट को नुकसान पहुंचा कर सीपीएम के नेतृत्व वाले मोर्चे की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है।

भाजपा ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव रहे विजयन थॉमस को अपनी पार्टी में शामिल कराया है। भाजपा का नेतृत्व ईसाई मतदाताओं के एक समूह को आकर्षित करने के लिए कई तरह के काम कर रहा है। इसी तरह 51 फीसदी के करीब हिंदू मतदाताओं को लुभाने के लिए अमित शाह ने खुद कई मठों के साधु-संतों से मुलाकात की। पार्टी ने 88 साल के ई श्रीधरन को पलक्काड सीट से उम्मीदवार बनाने का फैसला किया है। केरल की राजनीति की बारीक जानकारी रखने वालों का मानना है कि भाजपा जो कुछ भी कर रही है उसका नुकसान लेफ्ट से ज्यादा कांग्रेस को होगा। ध्यान रहे राहुल गांधी केरल में कांग्रेस पार्टी के सांसद हैं और अगर वहां कांग्रेस सत्ता में नहीं आती है तो यह उसके लिए बड़ा झटका होगा।

अब सवाल है कि क्या लेफ्ट मोर्चे को पता है कि भाजपा उसकी मदद कर रही है? और दूसरा सवाल यह है कि इसके बदले में भाजपा को क्या मिल रहा है? जानकार सूत्रों का कहना है कि एलडीएफ नेताओं को पता है कि भाजपा का प्रयास कांग्रेस को नहीं जीतने देने का है। इसके बदले में लेफ्ट के नेता पश्चिम बंगाल के चुनाव में भाजपा की मदद कर रहे हैं। जानकार सूत्रों के मुताबिक पार्टी काडर को मैसेज है कि, जहां लेफ्ट मोर्चा लड़ाई में नहीं है या कमजोर है वहां भाजपा की मदद करनी है। पश्चिम बंगाल में लेफ्ट की राजनीति कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस दोनों को कमजोर करने की है। उनको लगता है कि भाजपा जीती तो ममता की पार्टी खत्म हो जाएगी और फिर लेफ्ट की वापसी हो सकती है।

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