केजरीवाल की तरह ममता बदल रही हैं रास्ता

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चुनाव जीत कर बहुत से नेताओं को रास्ता दिखाया है। दिल्ली में पांच साल तक सरकार चलाने के बाद उन्होंने कामकाज का जो मॉडल बनाया, उसे तो बहुत से राज्य फॉलो कर ही रहे हैं पर साथ-साथ उनकी राजनीति का मॉडल भी बहुत लोग फॉलो करने लगे हैं। ध्यान रहे केजरीवाल ने दिल्ली में भाजपा की ओर से तमाम उकसावे के बावजूद चुनाव को सांप्रदायिक नहीं होने दिया। उनकी पार्टी के नेताओं ने भाजपा नेताओं से ज्यादा जोर से जय हनुमान, वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे लगाए। तभी तमाम भड़काऊ बातों के बावजूद भाजपा अपने कोर वोट में पांच फीसदी का इजाफा कर सकी।

इसी मॉडल पर ममता बनर्जी भी काम करने वाली हैं। पिछले दिनों वे पूर्वोत्तर परिषद की बैठक के लिए ओड़िशा गईं तो उन्होंने भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए। इसी मकसद से वे एक दिन पहले ही भुवनेश्वर पहुंच गई थीं। वे पहले भी कोलकाता में काली मंदिर जाती रही हैं। उन्होंने संशोधित नागरिकता कानून और नागरिक रजिस्टर का मुद्दा जरूर बनाया है पर भाजपा को मौका नहीं देना चाहतीं कि वे सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण करें। इसलिए वे भाजपा नेताओं की ओर से बनाई अपनी ‘ममता बी’ वाली छवि को बदलना चाह रही है। माना जा रहा है कि उनके चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने उनको विवादित मुद्दों से दूर रहने को कहा है।

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