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स्वामी के नाम की राजनीति

भाजपा के सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी अपने को पार्टी के सभी नेताओं से ऊपर मानते रहे हैं। पढ़ाई-लिखाई से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संबंधों, छवि और हिंदुत्व के प्रति समर्पण हर मामले में वे अपने को श्रेष्ठ मानते हैं। यही बात पिछले दिनों मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने लिखी है। उन्होंने स्वामी के ऊपर एक लेख लिखा, जिसमें स्वामी को अपना हीरो बताया। उन्होंने यह भी लिखा कि स्वामी जिसके हकदार हैं वह उनको नहीं मिला। उमा भारती ने यहां तक लिखा कि कलयुग में कौए खीर खा रहे हैं और हंस दाना चुग रहे हैं। स्वामी इस बात से खुश होंगे पर कौए और हंस की तुलना ने पार्टी के अनेक नेताओं को नाराज किया है और इसी वजह से उमा भारती के खिलाफ मोर्चा भी खुला है। पर ऐसा लग रहा है कि स्वामी भी खुद अपने नाम पर राजनीति होने दे रहे हैं और बार बार सरकार के बारे में कुछ ऐसी टिप्पणी कर रहे हैं, जिससे उनकी भी नाराजगी जाहिर हो रही है।

जैसे अभी उन्होंने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर ट्विट किया, जिसकी खूब चर्चा हो रही है। उन्होंने लिखा- राम राज्य में पेट्रोल 93 रुपए लीटर है, सीता के राज यानी नेपाल में 53 रुपए और रावण के राज यानी श्रीलंका में 51 रुपए लीटर है। सोशल मीडिया में यह पोस्ट पहले से वायरल हो रही थी, जिसमें यह भी लिखा जाता था कि क्या इसी राम राज की बात हो रही थी। बहरहाल, स्वामी के इस ट्विट को खूब शेयर किया गया और कांग्रेस के भी कई नेताओं ने इसे रीट्विट किया। अभी स्वामी ने केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को सुलझाने का भी सुझाव दिया है। उन्होंने ट्विट करके बताया कि भाजपा के एक दर्जन विधायक उनसे मिलने गए थे और किसान आंदोलन पर बात की थी। इसमें स्वामी ने उनसे कहा कि इस विवाद को सुलझाने का सबसे आसान तरीका यह है कि केंद्र सरकार कह दे कि यह कानून सिर्फ उन्हीं राज्यों में लागू होगा, जहां कि राज्य सरकार इसे लागू करने के लिए कहेगी। अब देखना है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व उनकी सलाह को कितना मानता है।

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