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तेलंगान, झारखंड और पंजाब-दिल्ली का फर्क

इन चार राज्यों- तेलंगाना, झारखंड, पंजाब और दिल्ली की सरकारों ने आरोप लगाया कि भाजपा ने उनके विधायकों को खरीदने और सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया है। लेकिन फर्क यह है कि तेलंगाना और झारखंड में विधायक सामने आए, उन्होंने लालच देने वालों का नाम लिया, मुकदमा दर्ज कराया और लोग गिरफ्तार भी हुए। झारखंड में तो कांग्रेस पार्टी के तीन विधायक नकदी के साथ पकड़े गए और कई दिन तक जेल में रहे। अब भी जमानत मिलने के बावजूद वे कोलकाता में ही हैं क्योंकि अदालत ने उनको कोलकाता नहीं छोड़ने को कहा है। इसी तरह तेलंगाना में विधायकों को पैसे और पद का लालच देने के आरोप में तीन लोग गिरफ्तार हुए और अभी जेल में हैं। उनके पास से भी भारी भरकम नकदी बरामद हुई।

इन दोनों राज्यों के उलट दिल्ली और पंजाब में सिर्फ आरोप लगे और शोर मचाया गया। सारे आरोप मुंहजबानी लगाए गए। कोई सबूत नहीं दिया गया, किसी का नाम नहीं लिया गया, फोन करने वाले तक का नंबर या नाम सामने नहीं आया और न किसी को गिरफ्तार किया गया। आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का दावा है कि उनके पास सबूत हैं लेकिन दिल्ली में किसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है और पंजाब में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर हुई है। सवाल है कि जब आप नेताओं के पास सबूत हैं तो वे उसका क्या अचार डाल रहे हैं? उस आधार पर नामजद एफआईआर क्यों नहीं कराई जा रही है? ऐसा लग रहा है कि आम आदमी पार्टी सिर्फ एक राजनीतिक नैरेटिव बनाने के लिए इस तरह के आरोप लगा रही है।

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