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पद्म पुरस्कारों के जरिए राजनीति

भारत में नागरिक पुरस्कार हमेशा राजनीति का जरिया रहे हैं। कांग्रेस पार्टी की सरकारें अपने लोगों को खुले हाथ से पद्म पुरस्कार बांटती थी। यहां तक कि सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न भी ऐसी ही उदारता से बांटे गए। नरेंद्र मोदी की सरकार ने पद्म पुरस्कारों के बंटवारे का एक सिस्टम बनाया और यह प्रयास किया गया कि बिल्कुल जमीनी स्तर पर आम लोगों के लिए काम करने वालों को पद्म पुरस्कार दिए गए हैं। इस प्रक्रिया की वजह से सचमुच कई ऐसे लोगों को पुरस्कार मिला, जिनका काम अद्भुत था पर लोगों को पता ही नहीं था। लेकिन इन सबके बावजूद पद्म पुरस्कारों के जरिए राजनीति साधने का काम अब भी चल रहा है। इस बार की पुरस्कारों की सूची से तो कम से कम ऐसा ही लग रहा है।

इस बार मरणोपरांत कई ऐसे लोगों को पद्म सम्मान दिया गया है, जो भाजपा की राजनीति को सूट करता है। जैसे रामविलास पासवान को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। बिहार की राजनीति में इसका खासा असर हुआ है। भाजपा के सहयोगी नीतीश कुमार विधानसभा चुनावों के बाद से ही पासवान के बेटे से बुरी तरह से नाराज हैं। पर रामविलास पासवान को पद्म भूषण दिए जाने का विरोध नहीं कर सकते हैं। उनके साथ भाजपा के शह-मात के खेल में इस पुरस्कार का बड़ा महत्व है।

ऐसे ही एसपी बालासुब्रह्मण्यम को मरणोपरांत पद्म विभूषण पुरस्कार से नवाजा गया। हाल ही में उनका निधन हुआ है। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि पुराने मद्रास प्रेसिंडेंसी के नेल्लोर में उनका जन्म हुआ था, जो अब आंध्र प्रदेश में है यानी वे दो राज्यों का प्रतिनिधित्व करते थे। उन्होंने हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगू और मलयालम तीनों भाषाओं में खूब गाने गए। ध्यान रहे तमिलनाडु और केरल में तीन महीने बाद चुनाव होने वाले हैं। इसमें संदेह नहीं है कि एसपी बालासुब्रह्मण्यम सर्वोच्च पुरस्कार के हकदार थे पर ऐन चुनाव से पहले उन्हें पुरस्कार देने का एक मकसद राजनीतिक भी है।

इसी तरह कांग्रेस पार्टी के नेता रहे दिवंगत तरुण गोगोई को भी सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित कर दिया। ऐसे तो भाजपा का उनसे बड़ा विरोध था और उनके ऊपर तमाम तरह से आरोप लगा कर भाजपा ने पिछला चुनाव लड़ा था। इस बार चुनाव से तीन महीने पहले उन्हें पद्म सम्मान देकर भाजपा ने उनके समर्थकों पर डोरे डाले हैं। बताया जा रहा है कि इस साल पद्म पुरस्कार पाने वाले 119 लोगों में नौ असम के हैं। ऐसे हरियाणा के सरदार तरलोचन सिंह को भी पद्म पुरस्कार देने का एक मैसेज है तो मौलाना वहीदुद्दीन को दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण और कल्बे सादिक को तीसरा सर्वोच्च सम्मान पद्म भूषण देने का भी एक अलग मैसेज है।

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