राजनीति

एनसीपी कि बेचैनी बढ़ रही है

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की जीत से भाजपा के नेता तो परेशान है ही लेकिन ममता बनर्जी के प्रति सद्भाव रखने वाली कुछ पार्टियों के नेता भी कम परेशान नहीं हैं। महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी सरकार में शामिल एनसीपी को भी बड़ी परेशानी है। तभी ममता बनर्जी की जीत के दो दिन बाद जैसे ही संघीय मोर्चा बनाए जाने की चर्चा शुरू हुई वैसे ही एनसीपी की ओर से एक बयान जारी करके कहा गया कि शरद पवार देश की विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने का प्रयास करते रहेंगे। शरद पवार की अभी तबियत ठीक नहीं है। उनके गॉल ब्लैडर का ऑपरेशन हुआ था और उसके बाद मुंह का अल्सर बढ़ गया था, जिसका दोबारा ऑपरेशन हुआ। इसलिए वे अभी आराम कर रहे हैं।

इसके बावजूद उनकी पार्टी ने यह बयान दिया कि वे विपक्ष को एकजुट करने का प्रयास करते रहेंगे। सोचें, इस समय विपक्ष को एकजुट करने का प्रयास करने की क्या जरूरत है, जब लोकसभा का चुनाव तीन साल के बाद होना है? असल में यह बयान इस चिंता में दिया गया कि विपक्ष का सर्वमान्य नेता होने की कसौटी पर अब ममता बनर्जी ज्यादा मजबूती से खड़ी दिख रही हैं। उन्होंने आमने-सामने की निर्णायक लड़ाई में नरेंद्र मोदी और अमित शाह को हराया है। उनके पास ज्यादा सांसद हैं, ज्यादा विधायक हैं और दूसरे कई कारणों से वे विपक्ष की धुरी बनने के योग्य हैं। अगर वे पहल करती हैं तो फिर शरद पवार पीछे छूट जाएंगे। तभी उनकी पार्टी ने उनको प्रासंगिक बनाए रखने के लिए यह बयान दिया।

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Chardham yatra open : इस तारीख से श्रद्धालुओं के लिए चारधाम यात्रा का होगा श्री गणेश, कारोबारियों के लिए खुला कमाई का रास्ता
देहरादून |  पिछले कुछ दिनों से चारधाम यात्रा को खोलने को लेकर संशय बना हुआ था। सरकार ने खोल दी फिर बंद…

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Chardham yatra open : इस तारीख से श्रद्धालुओं के लिए चारधाम यात्रा का होगा श्री गणेश, कारोबारियों के लिए खुला कमाई का रास्ता

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देहरादून |  पिछले कुछ दिनों से चारधाम यात्रा को खोलने को लेकर संशय बना हुआ था। सरकार ने खोल दी फिर बंद कर दी गई। इसके बाद भी नैनीतील हाइकोर्ट में इस फैसले पर बातचीत हो रही थी। लेकिन आखिरकार भक्तों के लिए सरकार ने एक खुशखबरी का ऐलान कर दिया है। देवभूमि उत्तराखंड में एक जुलाई से चारधाम यात्रा का श्री गणेश होने जा रहा है। लेकिन शुरुआत में यह यात्रा उत्तराखंड के कुछ जिलों के लिए ही प्रारंभ की गई है। 1 जुलाई से लेकर 10 जुलाई तक इस यात्रा का प्रारंभ  केवल चमोली, रूद्रप्रयाग व उत्तरकाशी जिलों के निवासियों केलिए ही की गई है। लेकिन जिले के लोग भी कोरोना निगेटिव रिपोर्ट दिखाकर इस यात्रा का आनंद ले पाएंगे। चमोली, रूद्रप्रयाग व उत्तरकाशी  के लोगों को भी इस कारण अनुमति दी गई है क्योंकि चारधाम यात्रा इन तीन जिलों में ही स्थित है। 10 जुलाई तक जिलास्तर पर चारधाम यात्रा की अनुमति दी है और कोरोना के मामले नियंत्रण में रहें तो 11 जुलाई से अन्य राज्यों के लोगों को बी अनुमति दे दी जाएंगी। बाद में भी सबी राज्यों को कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट दिखानी अनिवार्य होगी।

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कोरोना कर्फ्यु बढ़ाने के साथ कई रियायत दी गई

उत्तराखंड में कोरोना का कर्फ्यु भी 29 जून तक बढ़ा दिया है लेकिन इसमें छूट भी दी गई। जिससे कारोबारियों को राहत मिली है। शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने कहा कि इस दौरान अर्बन एरिया में नाइट कर्फ्यू लागू रहेगा। पहले हफ्ते में तीन दिन बाजार खुला करते थे लेकिन अब 5 दिन खुलेंगे। वीकेंड कर्फ्यु (saturday and sunday) लागू रहेगा। बाजार सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक खुले रहेंगे। इसके साथ ही होटल, बार, रेस्टोरेंट को पचास फीसदी क्षमता के साथ ही खोले जा सकेंगे।  लेकिन, रात दस बजे के बाद सुबह छह बजे तक ये होटल, बार , रेस्टोरेंट बंद रहेंगे।

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सरकारी कार्यालय 50 % क्षमता के साथ खुलेंगे

वहीं, सरकारी कार्यालय भी पचास फीसदी क्षमता के साथ खोलने की छूट दी गई है। आवश्यक सेवाओं से जुड़े विभाग अपनी पूरी क्षमता के साथ खुलेंगे। शादी-समारोह में पचास लोग ही आ सकेंगे। इससे पहले 20 लोगों की अनुमति दी गई थी। मैदान भाग से पहाड़ की ओर जाने के लिए कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य होगी। ये सभी फैसले 22 जून यानि कल से लागू होंगे। शनिवार को मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई इस  मीटिंग में राज्य सरकार ने यह अहम फैसले लिए। उत्तराखंड में कोरोना के संक्रमण पर अब एक हद तक काबू पा लिया गया है। पिछले 24 घंटे में राज्य में कोविड के 220 नए केस आए हैं। राज्य में एक्टिव केसों की संख्या भी घटकर तीन हजार 220 के आसपास पहुंच गई है।

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कारोबारियों में छाई खुशी की लहर

चारधाम यात्रा पहाड़ी लोगों का ही नहीं अन्य राज्य के लोगों का भी कमाई का साधन है। नेपाल से भी लोग यहां अपना घर चलाने के लिए आते है। उत्तराखंड में चार धाम यात्रा आर्थिकी का महत्वपूर्ण जरिया माना जाता है। चार धाम यात्रा से लाखों लोगों की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका जुड़ी होती है। चारधाम यात्रा पिछले साल भी जुलाई में ही शुरु की गई थी। कोरोना के डर से भक्तों का तांता भी लगा था। पिछले 2 सालों से कोविड-19 के कारण चार धाम यात्रा स्थगित होने से हजारों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। पहाड़ी लोगों के कमाने का एकमात्रा ज़रिया है यह यात्रा। हालांकि, सरकार ने पर्यटन कारोबारियों को कुछ रियायतें भी दी हैं.।लेकिन अब चार धाम यात्रा खोले जाने से कारोबारियों ने एक हद तक राहत की सांस ली है। यात्रा में जो खच्चर, घोड़ी, पालकी, कण्डी चलते है लो पुरे साल इंतजार करते है यात्रा खुलने का। मौसम की विपरीत परिस्थियों के कारण चारधाम यात्रा साल में छह महीने ही खुली रहती है। इस कारण कुछ लोगों की आजीविका इस यात्रा पर ही निर्भर करती है। यात्र3 के रास्ते में छोटी दुकान वाले वहीं के निवासी होते है। कुछ छोटे कारोबारियों का कहना है कि यात्रा के बाधित होने से रोटी का भी संकट पैदा हो गया था। कुछ कारोबारियों को खाना बी नसीब नहीं हुआ था। यात्रा खुलने से कारोबारियों में खुशी की लहर छायी है। एक बार फिर यात्रा गुलज़ार होगी। इसी के साथ सभी कारोबारी अपने अराध्य से यही प्रार्थना करते है कि इस महामारी से जल्द निजात मिलें। कुछ बड़े कारोबारियों का यह भी कहना है कि पिछले डेढ़ वर्ष से लोग घर बैठे है कोरोना ने सभी बंद करवा रखा है इस कारण लोगों के पास आमदनी नहीं हुई है। अनुमान लगाया जा रहा है कि चारधाम यात्रा में इस वर्ष ज्यादा संख्या में भक्तों का तांता नहीं लगेगा। रोजगार ना होने और बंद होने के कारण यह कहा जा रहा है।

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