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सपा के मुस्लिम नेताओं की पोजिशनिंग

Positioning Muslim leaders SP

समाजवादी पार्टी के नेता मुस्लिम नेता अपनी पोजिशनिंग कर रहे हैं। राज्य में लगातार दूसरी बार भाजपा के जीतने और योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद पार्टी के मुस्लिम नेताओं खास कर आजम खान, उनका परिवार और उनके करीबी नेता अपने को बचाने की जद्दोजहद में लग गए हैं। वैसे तो पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने भी सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाना बनाया है और नाराजगी जताते हुए कहा है कि पार्टी मुसलमानों के लिए कुछ नहीं कर रही है लेकिन उनकी बात अलग है। वे सपा में आते और बाहर जाते रहे हैं। पर आजम खान का मामला जरा अलग है। Positioning Muslim leaders SP

आजम खान का पूरा परिवार अलग अलग मामले में फंसा हुआ है। कुछ लोग जेल काट आए हैं और खुद आजम अब भी जेल में बंद हैं। एक एक करके अदालत से जमानत हो रही है लेकिन उनको लग रहा है कि सपा से दूरी बनाए बगैर पूरी तरह से मुक्ति संभव नहीं है। इसलिए उन्होंने खुल कर समाजवादी पार्टी से दूरी का संदेश दिया है। उनके मीडिया प्रभारी फसहत अली खान और उर्फ सानू ने सपा नेतृत्व पर जम कर निशाना साधा। कहा कि मुसलमानों के दम पर सपा को 111 सीटें मिलीं लेकिन पार्टी मुसलमानों के लिए कुछ नहीं कर रही। उन्होंने यहां तक कहा कि सपा नेतृत्व ने उनको यानी आजम खान और दूसरे मुसलमानों को भाजपा का दुश्मन बना दिया और खुद मजे ले रहे हैं।

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निश्चित रूप से यह बयान आजम खान की सहमति से दिया गया है। लेकिन इसके बाद जो अटकलें लगाई जा रही हैं वो सही नहीं हैं। जैसे कहा गया कि आजम खान विधायक दल का नेता नहीं बनाए जाने से नाराज हुए हैं। हकीकत यह है कि आजम खान को विधायक दल का नेता बनाने की बात कभी नहीं थी। हां, शिवपाल यादव जरूर इस बात से नाराज हुए हैं क्योंकि उनको विधायक दल का नेता बनना था। एक अटकल यह लगाई जा रही है कि आजम खान का परिवार भाजपा में जाएगा। इसका कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। भाजपा उनको चिमटे से भी नहीं छुएगी।

तभी सवाल है कि आजम खान और उनका परिवार पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से बचने के लिए क्या करेगा? उसका पहला चरण शुरू हो गया है। पहला चरण सपा से दूरी बनाने का है। उसके बाद दूसरा चरण किसी तरह से भाजपा को फायदा पहुंचाने का होगा। यह काम रामपुर लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में होगा। संभव है कि आजम खान का परिवार कुछ ऐसी राजनीति करे, जिससे भाजपा को जीत मिले। इसका एक तरीका यह है कि परिवार के किसी सदस्य को चुनाव नहीं लड़ाया जाए। दूसरा तरीका बसपा में जाकर उससे लड़ने का है। कुछ भी हो आजम खान का परिवार अब भाजपा के खिलाफ लड़ने वाली राजनीति अब छोड़ने वाला है।

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