कांग्रेस में सीडब्लुसी की तैयारी

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कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सांसदों के साथ शुक्रवार को वर्चुअल बैठक की, जिसमें उन्होंने कहा कि जल्दी ही कांग्रेस कार्य समिति की बैठक होगी, जिसमें पांच राज्यों के चुनाव नतीजों की समीक्षा की जाएगी। हालांकि इस समीक्षा से पहले ही उन्होंने बता दिया कि नतीजे कांग्रेस के लिए बहुत निराशाजनक और अप्रत्याशित थे। सो, जाहिर है कि कार्य समिति की बैठक में यही कहा जाएगा। इसके अलावा भी कुछ कारण हैं, जो कांग्रेस के नेताओं ने तलाश लिए हैं, जिनको हार के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

सोनिया गांधी की बुलाई कार्य समिति की बैठक 10 मई को होगी और उससे पहले दोनों तरफ तैयारियां शुरू हो गई हैं। कांग्रेस में परिवार के प्रति प्रतिबद्ध और राहुल गांधी के करीबी नेता चुनाव नतीजों की समीक्षा कर रहे हैं और वे हार के कारणों की सूची बना रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस के बागी नेताओं के समूह में भी तैयारी चल रही है और उधर भी हार के कारणों की सूची बनाई जा रही है। सो, यह माना जा रहा है कि इस बार कार्य समिति की बैठक में गरमा गरम बहस होगी क्योंकि बागी नेताओं के समूह से जो भी इस बैठक में शामिल होगा वह नेतृत्व पर दोष मढ़ेगा और चुनाव में किए बेसिर-पैर के तालमेल को और प्रचार की रणनीति को हार के लिए जिम्मेदार ठहराएगा। बागी नेताओं को प्रचार में नहीं भेजे जाने का मुद्दा भी उठेगा, खासतौर से गुलाम नबी आजाद को।

इस बैठक से पहले बागी नेताओं के समूह के एक प्रमुख नेता कपिल सिब्बल ने इरादे जाहिर कर दिए हैं। उन्होंने हार के कारणों की समीक्षा करने को तो कहा ही है साथ ही यह भी कहा है कि पार्टी के अंदर से उठ रही आवाजों को सुना जाना चाहिए। अब सवाल है कि पार्टी के अंदर से क्या आवाज उठ रही है? पार्टी के अंदर से नेतृत्व को लेकर आवाज उठ रही है। राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस के जानकार नेताओं का कहना है कि कार्य समिति की बैठक में केरल और असम की हार को लेकर उनके ऊपर सबसे ज्यादा सवाल उठेंगे।

कांग्रेस के जानकार नेताओं का कहना है कि पश्चिम बंगाल में पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की पार्टी के साथ और असम में बदरूद्दीन अजमल की पार्टी के साथ तालमेल का मुद्दा उठेगा। कांग्रेस में एक बड़ा खेमा इसका विरोध करता रहा था। दूसरी ओर राहुल के करीबी नेताओं का  तर्क है कि असम में दो क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिल कर लड़ने की वजह से पार्टी हारी। अगर असम जातीय परिषद और रायजोर दल का गठन नहीं हुआ होता और दोनों साथ मिल कर नहीं लड़े होते तो नतीजे अलग होते। इसी तरह केरल की हार के लिए कोरोना वायरस को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। कहा जाएगा कि केरल सरकार को राजनीतिक कारणों से नहीं बल्कि कोरोना के प्रबंधन की वजह से वोट मिला है।

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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