राजनीति

अभिभाषण जैसा राष्ट्रपति का संबोधन

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आजादी दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित किया। यह लोकतांत्रिक गणतंत्र की एक परंपरा है, जिसमें स्वतंत्रता दिवस लोकतंत्र के मुखिया का दिन होता है और गणतंत्र दिवस राष्ट्र के मुखिया का दिन होता है। गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति राजपथ पर झंडे की सलामी लेते हैं और स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले में प्रधानमंत्री झंडे की सलामी लेते हैं। पर स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर गणतंत्र के मुखिया का भाषण होता है, जिसमे आमतौर पर राष्ट्रपति लोकतंत्र, संसदीय परंपरा, भारत के इतिहास, आजादी के मूल्य, संविधान, मानवीय मूल्य जैसे बड़े विषयों पर बोलते हैं। यह भाषण आमतौर पर राजनीतिक बातों से मुक्त होता है और इसमें बड़ी सैद्धांतिक बातें होती हैं। यह भाषण राष्ट्रपति अपने अनुभव, ज्ञान के आधार पर तैयार करते हैं। पर इस बार राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संबोधन संसद में होने वाले अभिभाषण की तरह है, जिसे सरकार तैयार करके देती है।

राष्ट्रपति अपने संबोधन में केंद्र सरकार द्वारा मंजूर की गई नई शिक्षा नीति के बारे में बोले। उन्होंने जम कर इस नीति की तारीफ की। राष्ट्रपति आत्मनिर्भर भारत अभियान के बारे में भी बोले। जैसे लाल किले से प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत अभियान का जिक्र किया और अपने 87 मिनट के भाषण में 30 बार इस शब्द का इस्तेमाल किया। कुछ उसी तरह से राष्ट्रपति के भाषण में भी आत्मनिर्भर भारत अभियान का जिक्र था। राष्ट्रपति कोरोना वायरस के बारे में भी बोले और उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने समय रहते प्रभावी कदम उठाए, जिससे भारत को बहुत फायदा हुआ। सरकार के कामकाज और उसकी उपलब्धियों की जानकारी आमतौर संसद में दिए जाने वाले अभिभाषण में दी जाती है।

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Ashok Gehlot के समर्थन में उतरे विधायकों की सियासी दांव खेलने की तैयारी! कल बुलाई बैठक

Rajasthan Political Drama

जयपुर | Rajasthan Political Drama : राजस्थान में चल रहा सियासी खेला अब अपने चरम पर आने लगा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और सचिन पायलट (Sachin Pilot) के बीच वर्चस्व की लड़ाई अब और तेज हो गई है। गहलोत और पायलट खेमा अब आमने-सामने होता नजर आ रहा है। ऐसे में गहलोत समर्थक विधायकों का गुट कल बुधवार को जयपुर  में बैठक करने जा रहा है।

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सियासी दांव खेलने की तैयारी! (Rajasthan Political Drama)
इसी के साथ राजस्थान में गहलोत और पायलट की वर्चस्व की लड़ाई में निर्दलीय विधायकों और बीएसपी विधायक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कांग्रेस में आए इन विधायकों ने कल बुधवार को एक बैठक आयोजित की है जिसमें वो अपनी आगे की रणनीति बनाने वाले हैं। इस खेमे में 13 निर्दलीय विधायक है और बीएसपी से कांग्रेस में आए 6 विधायक हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि राजस्थान में गरमाई राजनीति के बीच विधायकों का यह खेमा भी अपने सियासी दांव खेलने वाला है और कांग्रेस आलाकमान से गहलोत सरकार में अपनी भागीदारी की मांग उठा सकता है।

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निर्दलीय विधायक ने भी पायलट पर किए तीखें प्रहार
गहलोत-पायलट के बीच की जंग में अब निर्दलीय विधायक रामकेश मीणा भी कूद पड़े हैं। उन्होंने सीएम गहलोत का पक्ष लेते हुए सचिन पायलट पर कड़ा प्रहार किया है। रामकेश मीणा ने कहा कि सचिन पायलट जितने दिन राजस्थान में रहेंगे उतना ही कांग्रेस पार्टी को नुकसान होगा। कांग्रेस के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब कांग्रेस के अध्यक्ष ने ही अपनी सरकार गिराने के प्रयास किए हो। पायलट मुख्यमंत्री बनने की सोच रहे हैं लेकिन कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान पायलट नहीं ही पहुंचाया है

पायलट समर्थकों ने खोलो मोर्चा, कहा ‘पायलट आ रहा है’
राजस्थान की राजनीति अब पूरी तरह से गरमा गई है। सचिन पायलट के बगावती तेवरों को देखते हुए, सियासी गलियारों में कुछ भी हो सकता है। सचिन पायलट समर्थकों ने आज मंगलवार को सोषल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है। पायलट के समर्थक ट्विटर पर ‘पायलट आ रहा है’ (Pilot Aa Raha Hai) हैशटेग ट्रेंड करा रहे हैं। लोगों से इसे पूरा समर्थन मिल रहा है। ऐसे में गहलोत खेमे में अब खलबली मचने लगी है।

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