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निजी अस्पतालों का अभियान विफल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित किया और सबको मुफ्त वैक्सीन लगाने की बात कही तो ऐसा प्रचारित किया गया कि देश के हर नागरिक को केंद्र सरकार मुफ्त वैक्सीन लगवाएगी। पर असल में ऐसा नहीं है। केंद्र सरकार पहले कुल उत्पादन का 50 फीसदी वैक्सीन खरीदती थी, इसे बढ़ा कर प्रधानमंत्री ने 75 फीसदी कर दिया। इसके अलावा बचा हुआ 25 फीसदी वैक्सीन ऊंची कीमत पर निजी अस्पतालों को खरीदना है। सवाल है कि जब सरकार सभी नागरिकों को मुफ्त में वैक्सीन लगवाएगी तो 25 फीसदी वैक्सीन निजी अस्पतालों को देने का क्या मतलब बनता है?

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मई के वैक्सीनेशन के आंकड़ों से भी यह बात साबित हुई है कि निजी अस्पतालों को ज्यादा वैक्सीन देने की जरूरत नहीं है। मई के महीनों में देश के निजी अस्पतालों को एक करोड़ 29  लाख वैक्सीन दी गई थी, लेकिन पूरे महीने में सिर्फ 22 लाख लोगों ने निजी अस्पतालों में वैक्सीन लगवाई। यानी एक करोड़ सात लाख वैक्सीन बच गई। दूसरी ओर सरकारी केंद्रों पर वैक्सीन नहीं होने की वजह से उन्हें बंद करना पड़ा। मई के मुकाबले अब तो वैक्सीन की कीमत भी बढ़ गई है। इसलिए अब निजी अस्पतालों में और भी कम लोग वैक्सीन लगवाएंगे। इसलिए सरकार को 25 फीसदी का काटो तत्काल खत्म करना चाहिए। 90-95 फीसदी वैक्सीन केंद्र सरकार खरीदे। निजी अस्पतालों का काम पांच-दस फीसदी वैक्सीन से भी चल जाएगा।

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