राजनीति

प्रियंका की सारी मेहनत पश्चिमी यूपी में

कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा खूब मेहनत कर रही हैं। पर उनकी सारी मेहनत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हो रही है। उन्होंने उन्हीं इलाकों में मेहनत शुरू की है, जहां भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमीन तैयार हो रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश वह इलाका है, जो किसान आंदोलन का केंद्र बना है। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत के आंसुओं और राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी की मेहनत ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी को भाजपा के खिलाफ खड़ा किया है। इस इलाके में भाजपा विरोधी माहौल बनाने में कांग्रेस की कोई खास भूमिका नहीं रही है। पर बने हुए माहौल का फायदा उठाने के लिए प्रियंका ने इस इलाके को टारगेट किया है।

उन्होंने सहारनपुर में किसान महापंचायत को संबोधित किया। किसानों के मुद्दों के लेकर उन्होंने एक के बाद एक चार किसान पंचायतों में भाषण दिया। बिजनौर, मुजफ्फरनगर और मथुरा में भी उनकी सभा हुई। इन इलाकों में पहले से किसान आंदोलन के समर्थन का माहौल है और कृषि कानूनों के विरोध में लोगों का मना बना हुआ है। इसलिए स्थानीय लोग बड़ी संख्या में प्रियंका की सभाओं में जुट रहे हैं। कांग्रेस के नेता इसे पार्टी का समर्थन समझने की भूल कर रहे हैं। उनको लग रहा है कि प्रियंका के जादू से कांग्रेस के संगठन की वजह से लोग जुट रहे हैं। यह गलतफहमी कांग्रेस को भारी पड़ सकती है।

प्रियंका दो बार इलाहाबाद भी गई हैं पर वहां कोई बड़ी राजनीतिक सभा नहीं की है। प्रयागराज का उनका दोनों दौरा मीडिया इवेंट था। उन्होंने आनंद भवन का दौरा किया, संगम में डूबकी लगाई, नाव चलाई और स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से मुलाकात की। दूसरे दौरे में वे उन नाविकों से मिलने गईं, जिन पर पुलिस ने लाठी चलाई थी। ये दोनों इवेंट मीडिया और सोशल मीडिया के लिए क्रिएट किए गए थे। इस तरह के कार्यक्रमों में पार्टी की कोई भागीदारी नहीं होती है। प्रियंका गांधी वाड्रा वैसे भी प्रयागराज जाएंगी और अपने परनाना के पुश्तैनी मकान में जाएंगी तो वह मीडिया में खबर बनेगी। इसलिए ये राजनीतिक कार्यक्रम नहीं हैं। उनका असली राजनीतिक कार्यक्रम पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हो रहा है, जहां बिना ज्यादा मेहनत के लोगों की भीड़ जुट रही है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन से बने माहौल का फायदा उठाने की प्रियंका की राजनीति से विपक्षी पार्टियां परेशान हैं। खासतौर से किसान संगठन के नेता और अजित व जयंत चौधरी को परेशानी हो रही है। उनको लग रहा है कि किसान आंदोलन का माहौल बनाने के लिए मेहनत उन्होंने की और अगले साल के चुनाव से पहले फसल काटने के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा पहुंच गई हैं। यह भी कहा जा रहा है कि अगर प्रियंका को किसानों से इतना ही लगाव है तो पूर्वी उत्तर प्रदेश में जाकर क्यों नहीं माहौल बना रही हैं ताकि वहां के किसान भी आंदोलन में शामिल हों? उनको यह भी लग रहा है कि कांग्रेस की अति सक्रियता से इलाके में में राजनीतिक माहौल बदल भी सकता है।

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