इमरजेंसी को रोने वाले पीटीआई से नाराज

अभी सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व कर रही भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इमरजेंसी की बरसी के मौके पर कांग्रेस को जम कर कोसा। खूब रोना-धोना हुआ और देश को बताया गया कि इमरजेंसी में कैसे लोकतंत्र का गला घोंटा गया था। किस तरह से मीडिया पर पाबंदी लगाई गई थी। हालांकि बाद में कांग्रेस के सूत्रों की ओर से यह खबर फैलाई गई कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने मोटे तौर पर इमरजेंसी का समर्थन किया था। बहरहाल, वह रहस्य अभी कायम है कि उसने समर्थन किया था या नहीं पर इमरजेंसी का रोना रोने वालों ने देश की एकमात्र विश्वसनीय न्यूज एजेंसी पीटीआई पर ताला लगाने का बंदोबस्त कर लिया है।

खबर है कि सत्तारूढ़ दल में पीटीआई को लेकर काफी दिनों से नाराजगी है और सरकार भी नाराज है। वीडियो न्यूज एजेंसी एएनआई को बढ़ावा देने के पीछे भी पीटीआई को कमजोर करने की रणनीति बताई जा रही है। तभी यह भी खबर है कि प्रसार भारती ने 2017 से ही पीटीआई के बिल का 25 फीसदी पैसा रोका हुआ है और कहा जा रहा है वह कीमतों पर फिर से मोलभाव करना चाहती है। इस बीच प्रसार भारती ने पीटीआई को निपटाने का एक और मौका खोज लिया। पीटीआई ने भारत में चीन के राजदूत सन वाइडुंग का इंटरव्यू किया, जिसमें उन्होंने गलवान घाटी की घटना के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया। बस इसी पर प्रसार भारती ने पीटीआई को नोटिस देकर कहा है कि उसकी कवरेज देश विरोधी है। हालांकि इसी इंटरव्यू में चीन के राजदूत ने माना था कि गलवान घाटी में उसके भी जवान मारे गए थे। पीटीआई का कहना है कि जो न्यूजमेकर होते हैं, एक नीति के तहत उनका इंटरव्यू होता है। सो, चीन के राजदूत के इंटरव्यू में कोई गलती नहीं है। फिर भी इमरजेंसी को रोने वाले नेता पीटीआई पर चाबुक चलाने में लगे हैं।

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